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Bhopal: अक्ल दाढ़ की सर्जरी अब होगी आसान, एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने बनाया स्वदेशी उपकरण, 5 साल में हुआ तैयार

Fri, 31 Jul 2026 05:54 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने अक्ल दाढ़ की जटिल सर्जरी आसान बनाने वाला स्वदेशी उपकरण विकसित किया है। करीब पांच साल के शोध के बाद तैयार इस उपकरण को भारत सरकार से पेटेंट मिल चुका है। इससे कम दर्द, सूजन और दवाओं का खर्च होने का दावा है।
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एम्स भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अक्ल दाढ़ निकलवाने के नाम से घबराने वाले मरीजों के लिए राहत की खबर है। एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने ऐसा स्वदेशी चिकित्सा उपकरण विकसित किया है, जिसकी मदद से मुश्किल अक्ल दाढ़ की सर्जरी को आसान बनाया जा सकता है। इस उपकरण को भारत सरकार से पेटेंट भी मिल चुका है। इसका नमूना फिलहाल चुनिंदा मरीजों की सर्जरी में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस उपकरण को मुख एवं जबड़ा शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. अंशुल राय और डॉ. बीएल सोनी, पूर्व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जितेंद्र और डॉ. समृद्धि ने करीब पांच साल के शोध, अनुभव और तकनीकी विकास के बाद तैयार किया है।
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कम दर्द, कम सूजन और दवाओं का खर्च घटने का दावा
डॉ. अंशुल राय के मुताबिक उपकरण के इस्तेमाल से मरीजों को पारंपरिक प्रक्रिया की तुलना में कम दर्द और सूजन का सामना करना पड़ रहा है। दवाओं पर होने वाला खर्च भी कम होने का दावा किया गया है। अक्ल दाढ़ सामान्य तौर पर 17 से 25 वर्ष की उम्र के बीच निकलती है। जबड़े में जगह कम होने पर कई बार यह दाढ़ पूरी तरह बाहर नहीं आ पाती और मसूड़े या हड्डी में फंस जाती है। कुछ मामलों में दाढ़ टेढ़ी दिशा में बढ़ती है, जिससे उसे निकालने के लिए आसपास की हड्डी हटानी पड़ती है या दाढ़ को टुकड़ों में काटकर निकालना पड़ता है। एम्स का यह उपकरण ऐसी ही जटिल स्थितियों में काम आसान करने के लिए बनाया गया है। चुनिंदा मामलों में इससे आसपास की हड्डी कम हटानी पड़ सकती है।

कम मुंह खुलने वाले मरीजों के लिए भी मददगार
इस उपकरण की खासियत यह बताई जा रही है कि कम मुंह खुलने वाले मरीजों में भी अक्ल दाढ़ तक पहुंच आसान हो सकती है। मुख कैंसर का उपचार करा चुके कुछ मरीजों में भी, जहां मुंह खोलने और दाढ़ तक पहुंचने में परेशानी होती है, यह उपकरण उपयोगी साबित हो सकता है।
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देश-दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी
फिलहाल उपकरण का नमूना उपयोग में है। आगे आवश्यक परीक्षण, तकनीकी जांच और नियामकीय मंजूरी के बाद इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल की राह खुलेगी। अक्ल दाढ़ निकालने की प्रक्रिया दुनिया भर में आम होने के कारण यह उपकरण भविष्य में मरीजों और दंत चिकित्सकों दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। एम्स भोपाल के डॉक्टरों का यह नवाचार चिकित्सा क्षेत्र में स्थानीय जरूरत और वर्षों के चिकित्सकीय अनुभव से तैयार समाधान की मिसाल माना जा रहा है।

 
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