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Bhopal News: कभी नवाबों के बेड़े में शामिल हुआ करती थी, अब युवाओं की पसंद बनी विंटेज जीप, अब जा रही दुबई तक

Fri, 13 Dec 2024 07:17 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

नवाब हमीद उल्लाह खां को विंटेज जीप रखने का शौक रहा है। उनके वाहन बेड़े में दर्जनों जीप शामिल थीं। कई दशक के बाद भी लोगों में यह क्रेज जिंदा है।
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विंटेज जीप - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कभी नवाबों की नजरों की चमक हुआ करने वाली विंटेज जीप का शौक और खुमार अब भी नवाबों के इस शहर भोपाल के सिर चढ़कर बोलता है। चमचमाती लग्जरी कारों को नजरअंदाज कर इन जीपों की सवारी अब भी यहां शान मानी जाती है। मड रैली से लेकर जंगल तफरीह तक में इस्तेमाल और दोस्तों के साथ बड़ी झील का चक्कर लगाने में जो मजा विंटेज के साथ है, वह किसी बेशकीमती कार से भी भोपाल के बाशिंदों को नहीं मिल पाता है।

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नवाब हमीद उल्लाह खां को  विंटेज जीप रखने का शौक रहा है। उनके वाहन बेड़े में दर्जनों जीप शामिल थीं। कई दशक के बाद भी लोगों में यह क्रेज जिंदा है। शहर में अब भी बड़ी संख्या में मोडिफाइड जीप शौक से चला रहे हैं। इन चाहतमंदों में युवाओं की संख्या बड़ी है। जानकारी के मुताबिक शहर में इस समय करीब 200 से ज्यादा विंटेज जीप सड़कों पर दौड़ रही हैं।

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भोपाल की कला पहुंच रही विदेशों तक
विंटेज जीप के मैकेनिक सलमान खान बताते हैं कि इस समय इन जीपों की कीमत 3 से 30 लाख रुपए तक है। भोपाल में तैयार की जा रही यह जीप मुंबई, बैंगलोर, जयपुर, दिल्ली समेत देश के कई शहरों तक पहुंच रही हैं। हाल ही में दुबई के एक शौकीन शेख ने भी भोपाल से विंटेज जीप तैयार करवाई है। सलमान बताते हैं कि 1942 से लेकर 1957 तक के मॉडल पर यहां काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बरसों पुरानी इन जीपों के पार्ट्स मिलना मुश्किल होता है। ऐसे में ज्यादातर काम कबाड़ख़ाने से लाए गए सामान के जुगाड से किया जाता है।

पुराना है जीप का इतिहास
फोर्ड जीपीडब्लू (जिसे आम तौर पर जीप या जीप के नाम से जाना जाता है, औपचारिक रूप से यूएस आर्मी ट्रक, 1/4 टन, 4×4 के नाम से जाना जाता है) और इसका विली एमबी समकक्ष, चार पहिया ड्राइव यूटिलिटी वाहन हैं जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान निर्मित किए गए थे। 1941 से 1945 तक निर्मित, जीप युद्ध के बाद नागरिक जीप सीजे में विकसित हुई और मनोरंजक चार पहिया ड्राइव वाहनों की एक पूरी श्रेणी को प्रेरित किया। माना जाता है कि "जीप" नाम आमतौर पर फोर्ड के वाहन के शुरुआती अक्षरों - जीपी से लिया गया है। यह फोर्ड जीपीडब्लू जीप 1943 में बनाई गई थी।

 जोड़ती है गतिशीलता से
अपनी सेना में गतिशीलता जोड़ने की चाहत में, 1937 में अमेरिकी सेना ने अपने मौजूदा, पुराने हल्के मोटर वाहनों के प्रतिस्थापन के लिए घरेलू ऑटोमोबाइल निर्माताओं से प्रस्ताव मांगे। सेना ने 11 जुलाई 1940 को अपनी आवश्यकताओं को औपचारिक रूप दिया और उन्हें 135 अमेरिकी मोटर वाहन निर्माताओं को सौंप दिया। शुरुआत में, केवल अमेरिकन बैंटम कार कंपनी और विलीज-ओवरलैंड मोटर्स ने प्रतिस्पर्धा में प्रवेश किया; बाद में फोर्ड मोटर कंपनी शामिल हुई। विस्तारित विकास और परीक्षण के बाद, विलीज को एक उत्पादन अनुबंध दिया गया।

अक्टूबर 1941 तक, यह स्पष्ट हो गया कि विलीज उत्पादन की मांग को पूरा नहीं कर सकता और फोर्ड को उनके उत्पादन का भी अनुबंध दिया गया। तब फोर्ड कार को GPW नामित किया गया था विलीज एमबी और फोर्ड जीपीडब्लू दोनों मॉडल जमीन पर बहुत प्रभावी थे, जिनमें कई मानकीकृत विशेषताएं थीं जैसे 6.00×16 टायर, 4,000 आरपीएम पर 60 हॉर्स पावर, बाईं ओर पीछे एक गैसोलीन कैन ब्रैकेट, ट्रेलर लाइट के लिए प्रावधान, स्पार्क इंटरफेरेंस सप्रेशन, एक ब्लैकआउट लाइट सिस्टम, ट्विन टॉप बो और सीलबंद स्प्रिंग शैकल्स।
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अमेरिकी सेना की हर सेवा द्वारा जीप का इस्तेमाल किया जाता था। सेना की पैदल सेना रेजिमेंटों को औसतन 145 जीपें दी जाती थीं। जीपों का इस्तेमाल कई उद्देश्यों के लिए किया जाता था, जिसमें टोही, बंदूक खींचना, केबल बिछाना, आरा मिलिंग, अग्निशमन पंपर्स, फील्ड एम्बुलेंस, ट्रैक्टर और उपयुक्त पहियों के साथ रेलवे पटरियों पर भी चलना शामिल था।

जीप लवर कहते हैं 
विंटेज जीप के शौकीन फरहान खान का मानना, जिस तरह विरासत को बचाने के प्रयास हो रहे हैं, विंटेज को सहेजने की कोशिश भी की जाना चाहिए।

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