सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता में सुधार और नई तकनीकों के उपयोग से मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन शनिवार और रविवार को भोपाल के रवींद्र भवन में होगा। इस सेमिनार का आयोजन भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) और मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा किया जा रहा है, जिसमें केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी शामिल होंगे।
मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सेमिनार में सरकारी और निजी क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक मंच पर आकर अपने अनुभव और नवीन तकनीकों के बारे में जानकारी साझा करेंगे। इसका उद्देश्य प्रदेश की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मजबूत और प्रभावी बनाना है।
सेमिनार के मुख्य विषय
सेमिनार में सड़क और पुल निर्माण के लिए नई तकनीक, नई सामग्रियों का उपयोग और अनुबंध प्रक्रिया (EPC – इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) से जुड़ी चुनौतियों पर विशेषज्ञ अपने अनुभव और सुझाव प्रस्तुत करेंगे। मंत्री राकेश सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ संरचनाओं का निर्माण नहीं है, बल्कि ऐसी परियोजनाओं का विकास करना है जो समाज के सतत विकास में योगदान दे सकें। हमारा लक्ष्य भविष्य की सभी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से और कम लागत में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करना है।”सेमिनार का उद्घाटन 19 अक्टूबर को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह करेंगे। इसके बाद तकनीकी सत्रों में देशभर के विशेषज्ञ नई निर्माण तकनीकों, सामग्रियों और ईपीसी प्रक्रिया पर अपने विचार साझा करेंगे।
दो दिवसीय सेमिनार के मुख्य विषय
शनिवार, 19 अक्टूबर: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई तकनीकों का उपयोग, पुल निर्माण में नई मशीनरी का उपयोग और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्रियों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही सड़क सुरक्षा और परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए आईटी तकनीकों के उपयोग और सीमांत सामग्रियों के बारे में भी विचार-विमर्श होगा।
रविवार, 20 अक्टूबर: EPC एग्रीमेंट्स की तैयारी, शेड्यूलिंग और अनुबंध प्रक्रिया से जुड़े ठेकेदारों और सहायक अभियंताओं की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, अनुबंधों में आने वाली चुनौतियों और विवादों के समाधान पर भी विचार किया जाएगा। इस सेमिनार का उद्देश्य प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और निर्माण प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों का समाधान तलाशना है, ताकि आने वाली परियोजनाएं अधिक प्रभावी, टिकाऊ और समय पर पूरी हो सकें।