प्रदेश में उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर आर्थिक बोझ बनते जा रहे हैं। बिजली कंपनी अनियमित वॉल्टेज या अन्य कारणों से मीटर जलने पर उपभोक्ताओं से 5,500 रुपये तक का बर्न चार्ज वसूल रही है। इसके अलावा मीटर को दूसरे स्थान पर लगाने के दौरान बाहरी सील टूटने पर उपभोक्ताओं को 400 रुपये का री-सील शुल्क देना पड़ रहा है। बिजली कंपनी की इस व्यवस्था के कारण उपभोक्ताओं को अचानक 5 हजार से लेकर 6 हजार रुपये तक का शुल्क चुकाना पड़ रहा है।
मीटर की संवेदनशीलता और बढ़ता खर्च
जिले में अब तक 4 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इनमें से 60 हजार उपभोक्ताओं के यहां ये मीटर दो साल पहले लगे थे। ये मीटर बेहद संवेदनशील हैं, जिसके कारण वॉल्टेज में गड़बड़ी या केबल फॉल्ट की वजह से इनके टर्मिनल जल जाते हैं। बाहर से मीटर चालू दिखाई देता है लेकिन घर के भीतर वॉल्टेज की समस्या बन जाती है। शिकायत करने पर कंपनी बर्न चार्ज और रीसिल शुल्क लगाती है। विशेषज्ञ स्मृति आंजना के अनुसार तीन से चार साल बाद जब मीटरों में गड़बड़ी शुरू होगी, तब उपभोक्ताओं पर शुल्क का भार और बढ़ेगा।
टैरिफ के माध्यम से वसूली की कवायद
राजहर्ष कॉलोनी में एक उपभोक्ता के घर में केबल जलने से खराबी आई, जिसके बाद लाइन स्टाफ ने जांच करके 5 हजार रुपये शुल्क बता दिया। केंद्र की आइपीडीएस योजना के तहत बिजली कंपनी ने स्मार्ट मीटर मुफ्त लगाए थे लेकिन अब कंपनी ने इन्हें टैरिफ दर से जोड़ दिया है। कंपनी ने मौजूदा टैरिफ में ही स्मार्ट मीटर के नाम पर 155 करोड़ रुपये जोड़े हैं। कंपनी अब इसे बिजली आपूर्ति खर्च मानकर टैरिफ के माध्यम से वसूल रही है। बिजली कंपनी इस साल भोपाल के सभी घरों में स्मार्ट मीटर स्थापित कर देगी।