भोपाल में रैली में सम्मानित करते विधायक
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करीब तीन दशक की परंपरा पैगाम ए मुहब्बत रैली को इस साल भी जन का बेहतर रिस्पॉन्स मिला। हालांकि इस रैली के जनक और सूत्रधार रहे पूर्व मंत्री आरिफ अकील की गैर मौजूदगी से दायरा कुछ कम किया गया, लेकिन इस सालाना आयोजन में शामिल हुए लोगों का उत्साह बरकरार दिखा।
आजादी पर्व 15 अगस्त को पुराने शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरने वाली पैगाम ए मुहब्बत रैली इस बार भी पुराने जोश, उत्साह और रंगत के साथ दिखाई दी। रैली के सूत्रधार रहे पूर्व मंत्री आरिफ अकील के दिवंगत हो जाने से इस बार कमान उनके विधायक बेटे आतिफ अकील के हाथों में थी। देर दोपहर 2 बजे निकलने वाली पैगाम ए मुहब्बत रैली के लिए चहल पहल सुबह से ही दिखाई दे रही थी। शहर के अलग-अलग इलाकों से जुलूस की शक्ल में आने वाली टुकड़ियों ने भोपाल टॉकीज चौराहा पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। बड़ी संख्या में दो और चार पहिया वाहनों और डीजे, ढोल, ताशों से सजी रैली लक्ष्मी टाकीज सराय तक जाकर पूरी हो गई। एक-एक कर पहुंचती इन टोलियों के अगुवाओं को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। अंतिम काफिला लेकर विधायक आतिफ अकील पहुंचे और मंच से लोगों को संबोधित किया।
मुहब्बत बनाए रखें
विधायक आतिफ अकील ने कहा कि उनके पिता मरहूम आरिफ अकील ने शहर से रिश्तों की जो परंपरा शुरू की है, वह निरंतर रहेगी। उन्होंने कहा कि शहर को जोड़ने के लिए किए जाने वाले सांस्कृतिक, धार्मिक, मनोरंजक, स्पोर्ट्स आदि के को कार्यक्रम उनके वालिद ने शुरू किए हैं, उनमें और निखार लाने के प्रयास किए जाएंगे। आतिफ ने कहा कि पैगाम ए मुहब्बत रैली न सिर्फ शहर, बल्कि इस प्रदेश की पहचान के रूप में पहचानी जाती है। इसको अगले बरस से कई गुना ज्यादा उत्साह, जोश, सहभागिता के साथ सारे शहर की नजरों के सामने रखा जाएगा।
सम्मानित हुए कलमकार
मरहूम आरिफ अकील की लोग जुटाने की परंपरा को उनके बेटे आतिफ ने भी बरकरार रखा। रैली समापन पर लक्ष्मी टॉकीज सराय पर बनाए गए मंच से शहर के नामवर पत्रकारों को शॉल और पुष्पमाला से सम्मानित किया गया।