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Bhopal:मंत्री विजयवर्गीय के बयान पर भड़के पटवारी, कहा-CM नहीं बनाया तो दिमाग खराब हो गया

Fri, 26 Sep 2025 07:16 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के चुंबन वाले बयान पर विवाद बढ़ता जा रहा है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने उनके इस्तीफे की मांग की है।  
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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के चुंबन वाले बयान पर विवाद बढ़ता जा रहा है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने उनके इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय को मुख्यमंत्री नहीं बनाया। उनको मुख्यमंत्री बनना है। 70 साल के बुजुर्ग हो गए हैं। मतलब कैलाश विजयवर्गीय बूढ़े हो गए हैं। अभी मुख्यमंत्री नहीं बने तो पागल हो गए हैं। वो पगलाहट में ऐसी बातें कर रहे हैं। माता रानी उन्हें सदबुद्धि दें। 
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पटवारी ने कहा कि मैं भाजपा की कार्यकर्ता बहनों, नेताओं और देश-प्रदेश के नागरिकों से अनुरोध करता हूं कि ऐसी विकृत मानसिकता के व्यक्ति यदि सत्ता में बैठेंगे तो इस देश की संस्कृति और पारिवारिक पृष्ठभूमि की रक्षा कैसे होगी। विजयवर्गीय ने जो टिप्पणी की है, वह राहुल गांधी पर नहीं बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति और सभ्यता पर टिप्पणी की है।

मैं भी अपनी बहन का सिर चूमता हूं-   विजयवर्गीय
उधर, बयान पर विवाद गर्माने के बाद विजयवर्गीय ने कहा कि आप अपनी बहन को बीच चौराहे पर आलिंगन करते हैं क्या? हमारे संबंध प्रेम के संबंध हैं। मैं भी अपनी बहन का सिर चूमता हूं। मैं रिश्ते की पवित्रता पर प्रश्न चिन्ह नहीं उठा रहा हूं। मेरा पूरा भाषण सुनते तो यह प्रश्न ही नहीं उठता। मैंने भारतीय संस्कृति और विदेशी संस्कृति की बात की है। विजयवर्गीय ने कहा मेरा भाषण टुकड़ों-टुकड़ों में लेकर कोई भी बात उठा लेंगे तो यह अच्छी बात नहीं है।
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यह था मंत्री विजयवर्गीय बयान
गौरतलब है कि शाजापुर में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने कहा था कि हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं। हमारी बहनों के गांव जीरापुर में पानी तक नहीं पीते हैं। मेरे पिताजी घर से पानी का लोटा लेकर जाते थे। आज के हमारे प्रतिपक्ष के नेता ऐसे हैं कि अपनी जवान बहन को बीच चौराहे पर चुंबन करते हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप में से कौन हैं, जो अपनी जवान बहन-बेटी को बीच चौराहे पर चुंबन करता है। ये संस्कारों का अभाव है। ये संस्कार तो विदेशी संस्कृति के हैं। इसमें उनकी गलती नहीं है। वह विदेश में पले-बढ़े हैं। ऐसे संस्कार का अनुभव है। वह प्रधानमंत्री को भी तू तड़ाक करके बात करते हैं।


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