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Bhopal News: किताबों के खेल में फंसे अभिभावक, कवर बदला, दाम बढ़े, भोपाल डीईओ कार्यालय के सामने फूटा गुस्सा

Fri, 06 Mar 2026 03:15 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल

सार

भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा किताबों का कवर और नाम बदलकर महंगे दामों पर बेचने के विरोध में अभिभावकों ने डीईओ कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। पालक महासंघ ने फीस और किताबों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज होगा।
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पालक संघ का विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों की किताब नीति को लेकर अभिभावकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। शुक्रवार को तुलसी नगर स्थित जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय के सामने पालक महासंघ मध्यप्रदेश के बैनर तले बड़ी संख्या में अभिभावक जुटे और निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ प्रदर्शन किया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन हर साल किताबों का नाम और कवर बदलकर वही किताबें ज्यादा कीमत पर बेच रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि शिक्षा के नाम पर निजी स्कूलों में “किताबों का कारोबार” चल रहा है और इसकी सीधी मार मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रही है।

कवर बदला, कीमत बढ़ी पुरानी किताब नई बताकर बिक्री
प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों ने बताया कि पहले जो किताबें 70-80 रुपये में मिलती थीं, वही किताबें नया कवर और बदला हुआ नाम लगाकर 100 रुपये से ज्यादा में बेची जा रही हैं। उनका कहना है कि किताबों की सामग्री लगभग वही रहती है, लेकिन कवर और संस्करण बदलने के कारण दुकानदार पुरानी किताबें लेने से इनकार कर देते हैं। इससे हर साल नया सेट खरीदना मजबूरी बन जाता है। अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्कूल हर साल सिलेबस में बदलाव कर देते हैं, जिससे बड़े बच्चों की पुरानी किताबें छोटे भाई-बहनों के किसी काम नहीं आतीं। इससे अभिभावकों का सालाना खर्च हजारों रुपये तक बढ़ जाता है।
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फीस और किताबों दोनों में मनमानी
प्रदर्शन में शामिल एडवोकेट नीतू त्रिपाठी ने कहा कि निजी स्कूल फीस बढ़ाने के साथ-साथ किताबों के जरिए भी अभिभावकों से अतिरिक्त पैसा वसूल रहे हैं। उन्होंने मांग की कि स्कूल केवल सरकार द्वारा स्वीकृत पाठ्यपुस्तकों का ही उपयोग करें और फीस व किताबों की कीमतों पर सख्त नियंत्रण लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को व्यापार की तरह चलाना बंद होना चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिल सके।

प्रतिबंधित किताबें चलाने का आरोप
पालक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ निजी स्कूल प्रतिबंधित किताबें भी चला रहे हैं। उनका कहना है कि ‘गरिमा पब्लिकेशन’ की एक किताब को जिला शिक्षा अधिकारी पहले ही डुप्लीकेट बताते हुए प्रतिबंधित कर चुके हैं, 
क्योंकि उसकी एमआरपी में 200 प्रतिशत से अधिक का अंतर पाया गया था। इसके बावजूद कई स्कूलों में वही किताबें पढ़ाई जा रही हैं।

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चुनिंदा दुकानों से ही खरीदने की मजबूरी
अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्कूल विशेष पब्लिकेशन की किताबें केवल चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध कराते हैं। इससे अभिभावकों को मजबूरी में तय दुकानों से ही महंगे दामों पर किताबें खरीदनी पड़ती हैं और अन्य दुकानदारों को व्यापार से बाहर कर दिया जाता है।
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सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा तेज
पालक महासंघ कमल विश्वकर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि किताबों की कीमतों, सिलेबस बदलाव और स्कूलों की मनमानी पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर हो रही इस मनमानी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


 
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