मध्यप्रदेश के विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने रविवार को राजधानी भोपाल के अंबेडकर मैदान में अपनी लंबित मांगों को लेकर बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। प्रदेशभर से हजारों कर्मचारी आंदोलन में शामिल हुए और नौकरी की सुरक्षा, हरियाणा मॉडल लागू करने, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा ठेका व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से सरकारी विभागों में नियमित सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल रही है।
हरियाणा मॉडल लागू करने की मांग
आंदोलन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए हरियाणा की तर्ज पर नीति लागू की जाए, ताकि कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा मिल सके। उनका कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में ठेकेदारों के भरोसे काम करना पड़ता है, जिससे कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होते हैं। उन्होंने ठेका व्यवस्था में सुधार कर कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की मांग की।
नौकरी की सुरक्षा और उचित वेतन का मुद्दा
कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से सरकारी योजनाओं और विभागों में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें नौकरी की कोई गारंटी नहीं है। कभी भी सेवा समाप्त कर दी जाती है। प्रदर्शनकारियों ने समान कार्य के लिए समान वेतन, समय पर वेतन भुगतान, ईपीएफ, ईएसआई सहित सभी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं लागू करने और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराने की मांग की।
बिजली विभाग के कर्मचारियों ने उठाया सुरक्षा का सवाल
आंदोलन में शामिल ऊर्जा विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों ने कहा कि वे रोजाना जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं। विद्युत दुर्घटनाओं में कर्मचारियों की मौत और गंभीर रूप से घायल होने की घटनाएं लगातार सामने आती हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता और सुरक्षा नहीं मिलती। कर्मचारियों ने दुर्घटना बीमा, उचित मुआवजा और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने की मांग की।
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17 सूत्रीय मांगों का सौंपा ज्ञापन
मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति, सेवा सुरक्षा कानून अथवा आउटसोर्स निगम का गठन, हर महीने सात तारीख तक वेतन भुगतान, विभाग से सीधे भुगतान की व्यवस्था, बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने, अनुभव के आधार पर वेतन वृद्धि और विभागीय भर्ती में प्राथमिकता, बिना जांच सेवा समाप्त करने पर रोक तथा अतिरिक्त कार्य का नियमानुसार भुगतान जैसी मांगें प्रमुख रूप से शामिल हैं।
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सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन फिलहाल पहला चरण है। सरकार यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो प्रदेशभर के आउटसोर्स कर्मचारी राजधानी भोपाल का घेराव करेंगे और चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि अब कर्मचारी अपने अधिकारों और सम्मानजनक सेवा शर्तों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।