मध्य प्रदेश के एमबीबीएस इंटर्न स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर अपने आंदोलन से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। 9 जुलाई से चल रहे प्रदेशव्यापी आंदोलन और कार्यबहिष्कार के बीच सोमवार से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को फिलहाल एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। हालांकि जूडा ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और बाकी सभी विरोध कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेंगे।
आयुक्त के बुलावे पर टली भूख हड़ताल
सोमवार को गांधी मेडिकल कॉलेज में डॉ. कृष्णा और डॉ. संकेत अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने वाले थे। इससे पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त एस. धनराजू ने जूडा प्रतिनिधिमंडल से संपर्क कर मंगलवार को बैठक बुलाने और मांगों पर गंभीर चर्चा का आश्वासन दिया। आयुक्त के इस भरोसे के बाद जूडा ने भूख हड़ताल को मंगलवार तक स्थगित करने का निर्णय लिया।
30 हजार रुपए स्टाइपेंड की मांग पर अड़े इंटर्न
आंदोलनरत इंटर्न डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि वर्तमान 14,337 रुपए मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपए किया जाए। उनका कहना है कि महंगाई और अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में दिया जा रहा स्टाइपेंड बेहद कम है, इसलिए इसमें वृद्धि जरूरी है।
यह भी पढ़ें-
गौ सम्मान के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब, राष्ट्रमाता का दर्जा और गौ-हत्या पूर्ण प्रतिबंध की मांग
लिखित आश्वासन के बिना नहीं लौटेंगे काम पर
जूडा ने स्पष्ट किया है कि केवल भूख हड़ताल स्थगित की गई है। आंदोलन, कार्यबहिष्कार और अन्य सभी विरोध कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेंगे। नियमित सेवाएं तभी बहाल की जाएंगी, जब सरकार की ओर से उनकी मांगों पर सक्षम स्तर से लिखित आश्वासन मिलेगा। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं और उम्मीद है कि मंगलवार को होने वाली बैठक सकारात्मक रहेगी। यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
उमंग सिंघार ने सीएम को लिखा पत्र
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 14,337 से बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इंटर्न डॉक्टर 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं, वार्ड प्रबंधन और मरीजों की देखभाल जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। मौजूदा स्टाइपेंड बढ़ती महंगाई और चिकित्सा शिक्षा की लागत के मुकाबले काफी कम है। सिंघार ने अन्य राज्यों की तरह हर साल स्टाइपेंड बढ़ाने की व्यवस्था लागू करने की भी मांग की। इस फैसले से प्रदेश के करीब 3,600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों को लाभ मिलेगा।