राजधानी की तंग बस्तियों में रहने वाले लोगों के बीच लगाए जा रहे सामुदायिक स्वास्थ्य शिविरों में स्वास्थ्य की एक अहम तस्वीर सामने आई है। अब तक इन शिविरों में 2,518 लोगों की जांच और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिया जा चुका है। जांच के दौरान बड़ी संख्या में लोगों में उच्च रक्तचाप और बढ़ी हुई रक्त शर्करा मिली है। वहीं गर्भवती महिलाओं की जांच में भी हाई रिस्क मामलों का अनुपात सामने आया है।
बीपी की जांच में हर 9वां व्यक्ति सामान्य नहीं
शिविरों में अब तक 1,026 लोगों के रक्तचाप की जांच की गई। इनमें 117 लोगों का बीपी बढ़ा हुआ मिला। यानी कुल जांच का 11.4 प्रतिशत, मतलब करीब हर 9 में 1 व्यक्ति उच्च रक्तचाप की स्थिति में मिला। ऐसे लोगों को चिकित्सकीय सलाह के साथ आगे की जांच और उपचार के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
शुगर जांच में हर 10वें व्यक्ति में गड़बड़ी
इसी तरह 1,157 लोगों की रक्त शर्करा की जांच की गई। इनमें 115 लोगों में शुगर बढ़ी हुई पाई गई। यह कुल जांच का 9.9 प्रतिशत है। यानी लगभग हर 10 में 1 व्यक्ति की जांच सामान्य नहीं मिली। शिविरों में असंचारी रोगों की स्क्रीनिंग के जरिए ऐसे लोगों की शुरुआती स्तर पर पहचान की जा रही है।
115 गर्भवती महिलाओं की जांच, 15 हाई रिस्क
गर्भवती महिलाओं की जांच में भी स्वास्थ्य विभाग को महत्वपूर्ण मामले मिले। कुल 115 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिनमें 15 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले सामने आए। यानी 13 प्रतिशत, या लगभग हर 8 में 1 गर्भवती महिला हाई रिस्क श्रेणी में मिली। इसके अलावा 9 गर्भवती महिलाओं में मध्यम स्तर का एनीमिया पाया गया। यह कुल गर्भवती महिलाओं का 7.8 प्रतिशत है। हाई रिस्क गर्भावस्था और एनीमिया से जुड़े मामलों की पहचान के बाद जरूरत के अनुसार आगे की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रेफर किया जा रहा है।
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बच्चों की सेहत पर भी नजर
शिविरों में केवल वयस्कों और गर्भवती महिलाओं की ही जांच नहीं की जा रही। 5 साल तक की उम्र के 300 बच्चों की स्वास्थ्य जांच भी की गई है। इनमें कुपोषण की पहचान के साथ जरूरत पड़ने पर बच्चों को आगे के उपचार और जांच के लिए रेफर किया जा रहा है। नियमित टीकाकरण की सुविधा भी इन शिविरों में उपलब्ध कराई जा रही है।
जांच से लेकर दवा और कार्ड बनाने तक सुविधा
सामुदायिक स्वास्थ्य शिविरों में लोगों को एक ही स्थान पर कई स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें स्वास्थ्य परीक्षण, मुफ्त जांच, दवा वितरण, असंचारी रोगों की स्क्रीनिंग, गर्भवती महिलाओं की जांच, हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान, कुपोषित बच्चों की पहचान और रेफरल शामिल हैं। इसके साथ ही लोगों को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ने के लिए आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी और ई-केवाईसी की सुविधा भी दी जा रही है। अब तक 52 आयुष्मान कार्ड और 260 आभा आईडी बनाए जा चुके हैं।
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श्रमिक और कामकाजी महिलाओं को प्राथमिकता
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि शिविरों का उद्देश्य बस्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों को उनके निवास के आसपास ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। खासतौर पर श्रमिक वर्ग की महिलाओं, कामकाजी महिलाओं और उनके बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा रही है। इन शिविरों के जरिए उन लोगों तक भी जांच और उपचार की सुविधा पहुंचाने का प्रयास है, जो कामकाज या अन्य कारणों से नियमित रूप से स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच पाते। जिन लोगों के आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी अभी नहीं बने हैं, वे भी शिविर में इसका लाभ ले सकते हैं।