राजधानी के बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों के खिलाफ जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस ने शनिवार को संयुक्त अभियान चलाया। गौरागांव और बिशनखेड़ी इलाके में फार्म हाउस, बाउंड्रीवाल और अन्य निर्माणों पर कार्रवाई करते हुए 21 अतिक्रमण हटाने का दावा किया गया। कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर विरोध भी हुआ, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान जारी रहा। सुबह से ही एसडीएम अर्चना शर्मा के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। जेसीबी की मदद से कई फार्म हाउसों की बाउंड्रीवाल तोड़ी गई और टीन शेड समेत अन्य अस्थायी निर्माण हटाए गए। प्रशासन का कहना है कि यह सभी निर्माण बड़े तालाब के एफटीएल क्षेत्र के 50 मीटर दायरे में बने थे।
नोटिस और सुनवाई के बाद शुरू हुई कार्रवाई
नगर निगम ने पहले ही एफटीएल क्षेत्र में बने निर्माणों को नोटिस जारी किए थे। इसके बाद संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया। सुनवाई पूरी होने के बाद निर्माण मालिकों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए, लेकिन ऐसा नहीं होने पर संयुक्त कार्रवाई शुरू की गई।
347 अतिक्रमण चिन्हित, अब बड़े निर्माणों पर कार्रवाई
इस वर्ष फरवरी में शुरू हुए सीमांकन अभियान के दौरान बड़े तालाब के आसपास कुल 347 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। शुरुआती चरण में 51 छोटे अतिक्रमण हटाए गए थे, जबकि बड़े निर्माणों पर कार्रवाई लंबित थी। अब प्रशासन ने फार्म हाउस, रिसॉर्ट और अन्य पक्के निर्माणों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है।
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तालाब किनारे रसूखदारों के निर्माण
भदभदा, बिशनखेड़ी, गौरागांव, बील गांव, सेवनिया गौंड और सूरज नगर क्षेत्र में कई फार्म हाउस, रिसॉर्ट, मैरिज गार्डन, रेस्टोरेंट और पक्के मकान एफटीएल क्षेत्र में बने हुए हैं। प्रशासन की कार्रवाई मुख्य रूप से इन्हीं निर्माणों पर केंद्रित रही।bएफटीएल सीमांकन के बाद कई निर्माण मालिकों ने अपने भवनों को तालाब की सीमा से बाहर बताते हुए आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बाद राजस्व और नगर निगम की टीम ने दोबारा सीमांकन किया। हाल ही में सीमांकन प्रक्रिया को लेकर नगर निगम के दो अधिकारियों को नोटिस भी जारी किए गए थे। कुछ निर्माण मालिकों ने निगम अधिकारियों से मुलाकात कर अपना पक्ष भी रखा था।
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कार्रवाई पर उठे सवाल
हालांकि प्रशासन ने 21 अतिक्रमण हटाने का दावा किया है, लेकिन मौके पर अधिकांश स्थानों पर केवल बाउंड्रीवाल और टीन शेड हटाए गए। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या पूरे अवैध निर्माण हटाए गए या कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रही। नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार चिन्हित 21 अतिक्रमणों में तीन निर्माण वर्ष 2022 से पहले के बताए गए हैं, जबकि 18 निर्माण 2022 के बाद के हैं। इसी आधार पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि पुराने और नए निर्माणों के लिए अलग-अलग मानदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और एफटीएल क्षेत्र में बने सभी अवैध निर्माणों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।