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Bhopal News: एम्स में थायराइड मरीजों के लिए बड़ी राहत,आधुनिक इलाज से हाइपरथायरॉइड और कैंसर का असरदार उपचार

Tue, 10 Mar 2026 06:31 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल

सार

एम्स भोपाल में न्यूक्लियर मेडिसिन की आधुनिक सुविधा शुरू होने से थायराइड के मरीजों को बड़ी राहत मिली है। रेडियो आयोडीन उपचार से हाइपरथायरॉइडिज्म और थायराइड कैंसर के मरीजों का बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।
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एम्स भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल एम्स में थायराइड से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए न्यूक्लियर मेडिसिन की आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस सुविधा के शुरू होने से हाइपरथायरॉइडिज्म और डिफरेंशिएटेड थायराइड कैंसर के मरीजों को बेहतर और प्रभावी उपचार मिल सकेगा। इससे प्रदेश के मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत भी कम होगी।
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हाइपरथायरॉइडिज्म में रेडियो आयोडीन उपचार बना कारगर विकल्प
डॉक्टरों के अनुसार हाइपरथायरॉइडिज्म ऐसी बीमारी है जिसमें थायराइड ग्रंथि सामान्य से अधिक सक्रिय हो जाती है। इस कारण मरीजों को लंबे समय तक एंटी-थायरॉइड दवाएं लेनी पड़ती हैं, जिससे कई बार मरीज शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं। ऐसे मामलों में न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में रेडियो आयोडीन उपचार एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में उपलब्ध है, जो थायराइड की अतिरिक्त सक्रियता को नियंत्रित करने में मदद करता है और लंबे समय तक दवाओं पर निर्भरता कम कर सकता है।

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थायराइड कैंसर के 90 प्रतिशत मामलों में संभव है पूरी तरह इलाज
विशेषज्ञों के मुताबिक थायराइड कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामलों का जड़ से इलाज संभव है, खासतौर पर जब वह डिफरेंशिएटेड प्रकार का हो। इस बीमारी में सामान्य तौर पर सर्जरी की जाती है और इसके बाद रेडियो आयोडीन उपचार दिया जाता है। यह उपचार शरीर में बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करता है और बीमारी दोबारा होने की संभावना को भी कम करता है।
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प्रदेश के मरीजों को अब बाहर जाने की जरूरत नहीं
एम्स भोपाल के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में हाइपरथायरॉइडिज्म और डिफरेंशिएटेड थायराइड कैंसर दोनों के इलाज के लिए रेडियो आयोडीन उपचार की सुविधा उपलब्ध है। इस सुविधा के शुरू होने से अब मध्य प्रदेश के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों के बड़े अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। समय पर जांच और सही उपचार से थायराइड से जुड़ी बीमारियों को प्रभावी रूप से नियंत्रित और ठीक किया जा सकता है।


 
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