राजधानी भोपाल के एमपी नगर क्षेत्र में स्थित निजी बैंक के ब्रांच में एक कर्मचारी द्वारा बड़े स्तर पर लेनदेन करने का मामला सामने आया है। बैंक कर्मचारी तीन साल से एक बीमा पॉलिसी ग्राहक के नाम से फर्जी खाता खोलकर उसे संचालित कर रहा था। इतना ही नहीं उस बैंक खाते से तीन साल में करीब चार करोड़ का लेनदेन भी कर लिया है। जिस बीमा पॉलिसी ग्राहक के नाम से बैंक खाता संचालित किया जा रहा था, जब उसे आयकर विभाग से नोटिस मिला तब इस फर्जीवाड़े का उसे पता चला। इसके बाद बैंक ग्राहक ने भोपाल पुलिस आयुक्त को शिकायत की। एमपी नगर पुलिस मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक में पूछताछ करने पहुंची तो पता चला कि जिस ब्रांच मैनेजर के कार्यकाल में यह कार्य हुआ है, उसका ट्रांसफर कई महीने पहले ही हो चुका है। जिस बैंक कर्मचारी ने यह फर्जीवाड़ा किया, वह बैंक की नौकरी बहुत पहले छोड़ चुका है।
2021 में बीमा पॉलिसी के लिए दिए थे दस्तावेज
पुलिस आयुक्त को फरियादी द्वारा की गई शिकायत में कहा गया है कि उसने वर्ष 2021 में स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के लिए अपने पहचान और अन्य दस्तावेज एक बीमा एजेंट को सौंपे थे। उक्त बीमा एजेंट ने आईसीआईसीआई के क्लर्क के साथ मिलकर दस्तावेजों का दुरुपयोग करते हुए फरियादी के नाम से बैंक खाता खुलवा दिया और उसमें लाखों का लेनदेन होने लगा। तीन साल में करीब चार करोड़ का लेनदेन उक्त बैंक खाते से हो चुका है।
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संदिग्ध लेनदेन के आधार पर आयकर ने पकड़ा
अक्तूबर 2024 में आयकर विभाग ने संदिग्ध लेनदेन के तहत उक्त बैंक खातों को लोकेट किया। इसके बाद उस खाते से संबंधित पूरी पड़ताल करने के बाद खाता धारक के नाम नोटिस जारी किया। नोटिस जब फरियादी को मिला तो वह अवाक रह गया। इसके बाद बैंक शाखा जाकर उसने शिकायत की। बैंक में कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद उसने आयकर विभाग से संपर्क किया। इसके बाद आयकर विभाग ने उसके नाम से खोले गए बैंक खाते में हुए पूरे ट्रांजेक्शन की डिटेल दी। इसके बाद उसने भोपाल पुलिस आयुक्त के पास शिकायत की है। शिकायत की जांच एसीसी एमपी नगर को सौंपी गई है। पुलिस को आशंका है कि यह बैंक खाता साइबर अपराधियों के लिए म्यूल अकाउंट की तरह इस्तेमाल हुआ होगा।
बैंक को नोटिस जारी
एमपी नगर एसीपी मनीष भारद्वाज ने बताया कि बैंक को नोटिस जारी कर बैंक खाता से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई है। बैंक अधिकारियों से भी बात की गई है। इस मामले में एक पुराना बैंक कर्मचारी संलिप्त बताया जा रहा है, जिसमें संबंध में भी जानकारी जुटाई हजा रही है। खाता खोलने वाले बैंक कर्मचारी और उस शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है।