फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhopal News: भोपाल में गुरुनानक जयंती पर उमड़ा आस्था का सैलाब, सजे गुरुद्वारे,हजारों श्रद्धालुओं ने टेका मत्था

Wed, 05 Nov 2025 06:13 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल में गुरुनानक जयंती पर बुधवार को शहर के गुरुद्वारों में श्रद्धा और सेवा का संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारों में मत्था टेका और गुरुनानक देव जी के उपदेशों को याद किया।
विज्ञापन
हमीदिया रोड स्थित मुख्य गुरुद्वारा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजधानी भोपाल में बुधवार को पहले सिख गुरु श्री गुरुनानक देव जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। शहर के प्रमुख गुरुद्वारों अरेरा कॉलोनी, हमीदिया रोड और पिपलानी को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया है। मंगलवार रात से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी, जहां गुरु वाणी और कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
विज्ञापन


हमीदिया रोड गुरुद्वारे में सबसे बड़ा लंगर
गुरुपर्व के अवसर पर शहर के सभी गुरुद्वारों में लंगर का आयोजन किया जा रहा है। सबसे बड़ा लंगर हमीदिया रोड स्थित मुख्य गुरुद्वारा किया जा रहा है, जहां लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया गया है। विभिन्न गुरुद्वारों में बन रही रोटियां और अन्य व्यंजन मुख्य स्थल पर पहुंचाए गए हैं। लंगर में करीब 35 से 40 क्विंटल खाद्य सामग्री का उपयोग किया जाएगा, जिसे सैकड़ों सेवादारों की टीम तैयार कर रही है।
विज्ञापन

विज्ञापन


यह भी पढ़ें-मुख्यमंत्री ने की घोषणा - गुरु तेगबहादुर जी का 350वां जयंती वर्ष और शहीदी दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा

 शबद-कीर्तन और दीवान
शहर के अन्य गुरुद्वारों अरेरा कॉलोनी और पिपलानी में भी शबद-कीर्तन, दीवान और अरदास के कार्यक्रम दिनभर चलते रहेंगे। सुबह प्रभात फेरी के साथ श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो गया है। गुरुद्वारों में नितनेम और भजन-कीर्तन के कार्यक्रमों के जरिए श्रद्धालु गुरु नानक देव जी के उपदेशों का स्मरण कर रहे हैं।



यह भी पढ़ें-भोपाल के शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर संकट, टीचर बने बीएलओ तो डेंगू नियंत्रण थमा

गुरुनानक देव के संदेशों से प्रेरित सेवा की भावना
गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन से समानता, मानवता और सेवा भाव का संदेश दिया था। उन्होंने ही लंगर की परंपरा की शुरुआत की थी, जो आज भी सिख समुदाय की सेवा भावना की मिसाल बनी हुई है।प्रकाश पर्व के इस अवसर पर श्रद्धालु धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ जरूरतमंदों की सहायता और समाजसेवा के कार्यों में भी हिस्सा ले रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें