प्रदेश में सरकारी स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था अब केवल उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं रह गई है। शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के बयान के बाद यह व्यवस्था डेटा गोपनीयता और डिजिटल निगरानी को लेकर नए विवाद के केंद्र में आ गई है। कुछ दिन पहले बैतूल में मंत्री ने कहा कि प्रदेश के करीब एक हजार गांवों में नेटवर्क की समस्या है। ऐसे लगभग 7 से 8 प्रतिशत शिक्षकों को ई-अटेंडेंस में छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि विभाग के डिजिटल प्लेटफॉर्म से यह जानकारी मिल जाती है कि कोई शिक्षक दिन में कितने घंटे ऑनलाइन रहा। उनका तर्क था कि जहां नेटवर्क उपलब्ध है, वहां ई-अटेंडेंस दर्ज करना संभव है।
शिक्षक संगठन बोले- हमारी आशंका सही निकली
शासकीय शिक्षक संगठन के प्रांताध्यक्ष राकेश दुबे ने मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षक संगठन पिछले एक वर्ष से यह आशंका जता रहा था कि ई-अटेंडेंस ऐप के जरिए शिक्षकों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। मंत्री के बयान से यह स्पष्ट हो गया कि विभाग के पास शिक्षकों की ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध रहती है।
तकनीक का उपयोग उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित होना चाहिए
उन्होंने कहा कि यदि विभाग यह देख सकता है कि कोई शिक्षक कितने घंटे ऑनलाइन रहा, तो यह कर्मचारियों की निजता से जुड़ा गंभीर विषय है। संगठन का कहना है कि तकनीक का उपयोग उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित होना चाहिए और ऐसी किसी भी व्यवस्था से बचना चाहिए, जिससे कर्मचारियों की निजी जानकारी के दुरुपयोग की आशंका पैदा हो।
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महिला शिक्षकों की सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया
राकेश दुबे ने कहा कि यह केवल पुरुष शिक्षकों का मामला नहीं है। बड़ी संख्या में महिला शिक्षक भी मोबाइल ऐप का उपयोग करती हैं। ऐसे में यदि उनकी डिजिटल गतिविधियों से जुड़ा डेटा संग्रहित किया जाता है तो उसकी सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि डेटा सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हुए तो निजी जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम बढ़ सकता है।
व्यवस्था में बदलाव की मांग
शिक्षक संगठन ने सरकार से ई-अटेंडेंस प्रणाली की समीक्षा करने और ऐसी व्यवस्थाओं में बदलाव की मांग की है, जिन्हें वे निजता के लिए जोखिम मानते हैं। संगठन का कहना है कि शिक्षा विभाग मानवीय संसाधनों से जुड़ा विभाग है, इसलिए तकनीक के उपयोग के साथ कर्मचारियों के अधिकारों और गोपनीयता का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
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सरकार का पक्ष
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है, वहां शिक्षकों को राहत दी जा रही है और उनका वेतन या सम्मान प्रभावित नहीं होगा। सरकार का कहना है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था का उद्देश्य केवल उपस्थिति प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। हालांकि मंत्री के बयान के बाद ई-अटेंडेंस को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर सरकार इसे प्रशासनिक निगरानी का साधन बता रही है, वहीं शिक्षक संगठन इसे निजता और डेटा सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं।