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भोपाल स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर-1 की तैयारी: जमीनी हकीकत अलग, कमिश्नर की सख्ती के बाद भी कई इलाकों में गंदगी

Wed, 13 May 2026 07:26 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 में बेहतर रैंकिंग के लिए अभियान चला रहा है, लेकिन शहर के कई इलाकों में गंदगी और बदहाल नाले व्यवस्था जमीनी हकीकत बयां कर रही है। कमिश्नर संस्कृति जैन लगातार निरीक्षण और कार्रवाई कर रही हैं, इसके बावजूद कई क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था कमजोर बनी हुई है।
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नाले के पास फैली गंदगी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल नगर निगम एक तरफ स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 में बेहतर रैंकिंग हासिल करने के लिए लगातार अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजधानी के कई इलाकों में फैली गंदगी और बदहाल नाले व्यवस्था निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है। शहर में चल रहे फील्ड सर्वे के बीच कई क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था कमजोर नजर आ रही है, जिसका सीधा असर स्वच्छता सर्वेक्षण पर पड़ सकता है।
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कमिश्नर खुद मैदान में, अधिकारियों को नोटिस
नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन स्वच्छता व्यवस्थाओं को लेकर लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। वे खुद अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर सफाई व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रही हैं। लापरवाही मिलने पर कई कर्मचारियों और अधिकारियों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिस क्षेत्र में गंदगी या सफाई में लापरवाही मिलेगी, वहां के जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।

कई इलाकों में हालात खराब
सख्ती और लगातार निरीक्षण के बावजूद शहर के कई हिस्सों में हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। राजधानी के नेहरू नगर समेत कई कॉलोनियों और अंदरूनी इलाकों में नालों की सफाई अधूरी है। कई जगह नालों में प्लास्टिक, कचरा और गाद जमा है। वहीं सड़कों किनारे फैली गंदगी और उठती बदबू से लोग परेशान हैं। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि लंबे समय से नियमित सफाई नहीं हो रही और शिकायतों के बाद भी स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा।
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बारिश से पहले बढ़ी जलभराव की चिंता
सबसे बड़ी चिंता आने वाले मानसून को लेकर है। लोगों का कहना है कि यदि बारिश से पहले नालों की सफाई पूरी नहीं हुई, तो जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है। नालों में जमा कचरा पानी की निकासी रोक सकता है, जिससे सड़कों और रिहायशी इलाकों में गंदा पानी भरने का खतरा रहेगा।इसके साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। शहरवासियों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान कई इलाकों में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया।
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स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल
गौरतलब है कि भोपाल देश की स्वच्छ राजधानियों में अपनी पहचान बनाए रखने की कोशिश में जुटा है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के तहत अप्रैल से शहर में फील्ड सर्वे शुरू हो चुका है, जो करीब 45 दिनों तक चलेगा। इस दौरान सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, डोर-टू-डोर कलेक्शन, नालों की सफाई और नागरिकों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर शहर की रैंकिंग तय की जाएगी। नगर निगम मुख्य सड़कों, बाजारों और प्रमुख स्थानों पर विशेष सफाई अभियान चला रहा है, लेकिन कई अंदरूनी इलाकों में अब भी गंदगी के ढेर और बदहाल नाले नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सिर्फ निरीक्षण, नोटिस और अभियान से शहर की वास्तविक तस्वीर बदलेगी या फिर जमीनी स्तर पर मजबूत सफाई व्यवस्था की जरूरत है।
 
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