भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच राजधानी भोपाल में 1971 के पुराने संस्करण की जगह एक अपडेटेड सिविल डिफेंस योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने भोपाल नगर निगम और अधिकारियों को इस पर काम शुरू करने को कहा है। साथ ही आग से बचाव के लिए नगर निगम ड्रोन का उपयोग करेगा। दरअसल दो दिन पहले प्रमुख विभागों की भागीदारी वाली मॉक ड्रिल के दौरान कई उपकरण ठीक से काम नहीं कर रहे थे।
अग्नि सुरक्षा उपकर होंगे अपडेट
आग से सुरक्षा बढ़ाने के लिए कलेक्टर ने बीएमसी को पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले निगरानी ड्रोन के समान ड्रोन अपनाने के निर्देश दिए है। ये ड्रोन आग की घटनाओं के दौरान तेजी से आकलन और रणनीतिक योजना बनाने में मदद करेंगे। इसके साथ ही शहर के अग्नि सुरक्षा उपकरणों को 8-10 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से अपग्रेड किया जाएगा।
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शहर के 10 फीसदी लोगों को करेंगे प्रशिक्षित
भोपाल शहर की कम से कम 10 फीसदी आबादी को बुनियादी आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। जिससे हर दसवां नागरिक सिविल डिफेंस स्वयंसेवक बन सके। कलेक्टर ने शहर भर में अस्पतालों, स्कूलों और सामुदायिक हॉलों सहित आश्रय गृहों की पहचान करने का भी आदेश दिया, जिन्हें सात क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक क्षेत्र के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) रिपोर्टिंग अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि 1971 में 5 किलोमीटर के दायरे मे था जो आज लगभग 25 किलोमीटर तक फैल गया। जो आज के आकार से पांच गुना अधिक है। इधर स्मार्ट सिटी अधिकारियों को शहर भर में आपातकालीन अलर्ट के लिए नए विकसित क्षेत्रों में सायरन लगाने का निर्देश दिया गया है।
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एसडीआरएफ पदों को भरने की तैयारी
एसडीएम अंकुर मेश्राम ने बताया कि मार्गों की मैपिंग, खाद्य आपूर्ति और आरक्षित संसाधनों की निगरानी सहित नागरिक सुरक्षा रणनीति पर काम शुरू हो गया है। उन्होंने एसडीआरएफ पदों को तत्काल भरने की बात भी कही है। क्योंकि वर्तमान में 450-500 कर्मियों की संख्या आवश्यकताओं से कम है।