राजधानी भोपाल में नगर निगम शहर में जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सर्वे (जीआईएस) करवाने की तैयारी कर रहा है। इस सर्वे से शहर के अवैध कनेक्श को वैध करने की कोशिश की जाएगी। अनुमान है कि भोपाल में 40 से 50 हजार अवैध नल कनेक्शन हैं, लेकिन निगम इन आंकड़ों को सर्वे से पुख्ता करना चाहता है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद निगम डोर-टू-डोर जाकर अवैध कनेक्शनों नों को को वैध करेगा। निगम के अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए टेंडर कराया जा रहा है। जल्द ही सर्वे शुरू कराया जाएगा।
मिल सकता है 175 करोड़ का राजस्व
दरअसल भोपाल नगर निगम राजस्व रिकार्ड के मुताबिक शहर में पांच लाख संपत्तियां हैं। जबकि प्रॉपर्टी टैक्स खाते 2.75 लाख हैं। जलकार्य विभाग का रिकार्ड बताता है कि शहर में नल कनेक्शनों का आंकड़ा 2.51 लाख है। जबकि विभागीय अनुमान है कि शहर में अवैध नल कनेक्शनों का आंकड़ा 40 से 50 हजार है। अगर इस योजना से ये सभी कनेक्शन वैध हो जाते हैं और पैसा जमा कर देते हैं तो इन कनेक्शनों को निगम को 175 करोड़ का राजस्व और मिल सकता है। कनेक्शन की संख्या के बीच लगभग 25 हजार का अंतर है। पुराने शहर में शाहजहांनाबाद, चौकी इमामबाड़ा, भोईपुरा, कुम्हारपुरा, संजय नगर, नारियल खेड़ा, प्रेम नगर, टीला जमालपुरा, गौतम नगर, निशातपुरा, फिरदौस नगर, पुतलीघर, रविदासपुरा, कबीटपुरा, रेजिमेंट रोड, जेपी नगर, आरिफ नगर, काजीकैंप, शांति नगर, फूटा मकबरा, अटल अयूब नगर, सिलावटपुरा, अहीरपुरा, मंगलवारा, गुर्जरपुरा, मारवाड़ी रोड, आजाद मार्केट, इब्राहिमगंज, विश्वकर्मा नगर में भी अवैध नल कनेक्शन हैं। निगम हर साल 1000 बकायादारों के कनेक्शन काटता है। इनमें से 800 अवैध रूप से फिर कनेक्शन ले लेते हैं।
सर्वे के लिए कर रहे हैं टेंडर
नगर निगम के चीफ इंजीनियर उदित गर्ग ने बताया कि शहर के अवैध नल कनेक्शनों को जानने के लिए जीआईएस सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए निजी कंपनी की सहयाता ली जाएगी। टेंडर लग गया है। जल्द ही सर्वे शुरू हो सकता है। अवैध कनेक्शनों को अभियान चलाकर वैध किया जाएगा। दो साल का वॉटर टैक्स, पेनल्टी और एकमुश्त कनेक्शन चार्ज के साथ कनेक्शन वैध कराया जा सकता है।