मध्य प्रदेश कांग्रेस में जब से कमलनाथ को हटाकर जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी के अंदर घमासान मचा हुआ है जहां ज्यादातर नेता पटवारी को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कुछ जमीन नेता भी पद नहीं मिलने से नाराज हैं। इस समय कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है! दरअसल, शुक्रवार को प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है। इसे लेकर मंच पर नेताओं की कुर्सी लगाई गई। लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही विधान सभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की कुर्सी हटा दी गई। अब इसे लेकर सियासत शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस पार्टी और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी पर हमला बोला हैं। वहीं एक दिन पहल गुरुवार को कांग्रेस के पॉलिटिकल अफेयर समिति और एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक हुई थी। इन दोनों बैठकों से दिग्गज नेताओं ने दूरी बनाई थी। कमेटी के आधे सदस्य नहीं पहुंचे। पूर्व सीएम कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, अजय सिंह, अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल, फूल सिंह बरैया, प्रवीण पाठक, बाला बच्चन, शोभा ओझा मीटिंग में नहीं पहुंचे। दूसरे दिन भी दिग्गज नेताओं ने बैठक से दूरी बनाए रखी।
इस लिए बैठक से पहले हटाई गई कुर्सी
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में शुक्रवार को नवनियुक्त प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी की पहली बैठक हुई। बैठक के लिए मंच पर नेताओं के नाम की कुर्सियां लगाई गई थी। मंच पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की भी कुर्सी रखी गई थी। लेकिन गुरुवार की बैठक में शामिल नहीं होने पर की मीटिंग से उमंग सिंघार की कुर्सी हटा दी गई। इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी ने निशाना साधा हैं।
बीजेपी ने कहा ये होता है कुर्सी का खेल
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि ये होता है कुर्सी का खेल! कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हटवाई नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की कुर्सी! सिंघार जी… कुछ समझ में आया? प्रदेश में आप भले ही कांग्रेस को मजबूत करने का प्रयास करें,लेकिन आपके ही लोगो ने आपकी कुर्सी पहले खिसकाई फिर बाहर पटकवा दी। पार्टी में आपका कितना सम्मान है…शायद ये तस्वीर देखकर आपको समझ में आ गया होगा। आशीष अग्रवाल ने आगे लिखा कि उमंग सिंघार जी इस बैठक में ना आकर चाहे कितनी भी नाराजगी जाहिर कर लें, लेकिन जीतू पटवारी को उससे रत्तीभर फर्क नहीं पड़ता। जीतू जी के लिए जैसे पार्टी गई तेल लेने, वैसे ही उमंग सिंघार की कुर्सी भी गई तेल लेने!