कभी कार्यकर्ताओं को झिड़क भी दिया करते थे और कभी-कभार भोपाली स्टाइल की कोई गाली भी उनके मुख से अनचाहे टपक जाया करती थी। जिम्मेदारियों के बीच सख्त रवैया अपनाए रखने की मजबूरी भी उनके साथ बनी रही है। जन से जुड़े कामों के लिए अफसरों को फटकार लगा देने के लिए भी उनकी बदनामी जैसी ख्याति बन गई थी। लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद भोपाल से भाजपा प्रत्याशी आलोक शर्मा के व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव नजर आ रहे हैं।
दो दिन पहले अपने परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा पर निकले आलोक अब चुनावी चिंताओं से दूर दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताने की नीयत से धार्मिक स्थल के लिए निकले हैं। इस दौरान वे अपने आराध्य को नमन, अब तक की सकारात्मक परिस्थियों के लिए आभार और बेहतर भविष्य की कामना इस दौरान करेंगे।
सहज, सरल और सुलभ
आलोक शर्मा से सियासी तौर पर जुड़े भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता सैयद आरिफ अली और असद मकसूद बताते हैं कि चुनाव के बाद आलोक भाई के व्यवहार में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। वे पहले से ज्यादा सहज, सरल और सुलभ हो गए हैं। कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की उनकी पुरानी आदत है। इसमें अब और विस्तार हो गया है। वे छोटे कार्यकर्ताओं के हर सुख दुख से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। साथ ही अपनी मेहनत के दम पर जीती हुई बाजी का आभार प्रकट करना भी आलोक भाई ने शुरू कर दिया है।
जब-जब हारे, तब-तब उभरे
मोहल्ले की सियासत से लेकर प्रदेश तक में अपनी छाप छोड़ चुके आलोक शर्मा के साथ यह किवदंती भी जुड़ गई है कि जब-जब उनके हिस्से हार आई है, तब-तब उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली है। उत्तर विधानसभा से पहली बार चुनाव में शिकस्त पाने के बाद आलोक शर्मा ने महापौर चुनाव में कामयाबी दर्ज की थी। एक विधानसभा की बजाए उन्हें पूरे शहर के लिए काम करने का मौका मिला था। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें फिर हार का मुंह देखना पड़ा था। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने आलोक पर दोबारा विश्वास जताया। अब वे शहर और प्रदेश की सीमा से बाहर राष्ट्रीय स्तर पर काम करने के लिए आगे बढ़ गए हैं। भाजपा के लिए सुरक्षित सीट मानी जाने वाली भोपाल लोकसभा से अवश्यभावी मानी जा रही आलोक की जीत के बाद वे भारतीय ससद में अपने शहर और प्रदेश के आवाज उठाते नजर आने वाले हैं।
पुराने शहर को उम्मीदें
खुद को बर्रूकट भोपाली कहने वाले आलोक शर्मा का नाता पुराने शहर की तंग गलियों से है। महापौर रहते हुए उन्होंने इस इलाके के लिए कई बड़े काम किए हैं। अपने क्षेत्र के लिए काम करने का उनका जुनून यह भी रहा है कि विधानसभा चुनाव में हार मिलने के बाद भी आलोक ने पुराने शहर के नाइट कल्चर को बंद कराने की मुहिम चलाई और इसमें सफलता प्राप्त की। इस लिहाज से उम्मीद की जा रही है कि संसद के गलियारों में पहुंचने के बाद आलोक शर्मा अपनेनिस इलाके के सौंदर्य और सुविधाओं के लिए कुछ बड़े प्रोजेक्ट पर काम करेंगे।
...भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट