राजधानी स्थित एम्स के चिकित्सक जहां अपनी पूरी शक्ति से मरीजों का इलाज करते हैं वहीं मरीजों की जान बचाने के लिए हर तरह के प्रयास करने को तैयार रहते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिस में एम्स डॉक्टरों ने एक एनीमिया पीड़ित गर्भवती महिला को रेयर ब्लड ग्रुप उपलब्ध कराकर उसकी जान बचाई है। गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए न सिर्फ डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन ने तत्परता दिखाई, बल्कि एक रक्तदाता ने 700 किलोमीटर की दूरी तय कर अपना दुर्लभ रक्त देकर महिला को नया जीवनदान दिया। बताया जा रहा है कि महिला को एनीमिया था और वह 40 वीक की प्रेग्नेंसी में थी।
गंभीर हालत में थी गर्भवती महिला
एम्स के चिकित्सकों ने बताया कि गर्भवती महिला की हालत गंभीर थी। तत्काल ब्लड चढ़ाने की जरूरत थी, लेकिन चुनौती यह थी कि महिला का रक्त समूह "बॉम्बे ब्लड ग्रुप" था, जो अत्यंत दुर्लभ होता है। अस्पताल के ब्लड बैंक में यह उपलब्ध नहीं था। महिला का जीवन संकट में था। डॉक्टरों के पास समय कम था और अगर जल्द ही रक्त नहीं मिलता, तो जच्चा और बच्चा दोनों की जान को खतरा हो सकता था।
मिशन 'जीवन रक्षा' की शुरुआत
एम्स भोपाल के निदेशक प्रो. अजय सिंह को जब यह जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत चिकित्सकों और ब्लड बैंक टीम को सक्रिय कर दिया। वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. संजय वर्मा, डॉ. सीमा अग्रवाल और ब्लड बैंक प्रभारी आदित्य शुक्ला ने मिलकर एक आपातकालीन योजना बनाई। ब्लड बैंक में खोजबीन के बाद जब रक्त नहीं मिला, तो समाजसेवी संगठन "जीवन संजीवनी" से संपर्क किया गया, जो दुर्लभ रक्त समूहों के रक्तदाताओं की सूची तैयार करने में मदद करता है।
शिर्डी से आए रक्त दादा
इस संगठन के प्रमुख अशोक नायक, जो वर्षों से रक्तदान जागरूकता के लिए काम कर रहे हैं, ने मामले को प्राथमिकता से लिया और संभावित रक्तदाताओं की खोज शुरू की। उसी दौरान जानकारी मिली कि शिर्डी में रहने वाले रवींद्र, जो स्वयं बॉम्बे ब्लड ग्रुप के दुर्लभ रक्तदाता हैं, मदद के लिए आगे आ सकते हैं। समस्या यह थी कि रवींद्र उस समय शिर्डी में थे, जबकि महिला भोपाल में भर्ती थी और उसे तुरंत रक्त की आवश्यकता थी। बिना समय गंवाए, अशोक नायकऔर एम्स भोपाल प्रशासन की मदद से एक विशेष वाहन की व्यवस्था की गई। रवींद्र ने तत्काल 700 किलोमीटर की यात्रा शुरू की और समय से पहले भोपाल पहुंचने के लिए पूरा प्रयास किया। इस दौरान अस्पताल प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए था और डॉक्टर मरीज की हालत को नियंत्रित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे थे। दूसरी तरफ, रवींद्र भी अपनी यात्रा के दौरान हर घंटे अपनी स्थिति साझा कर रहे थे, ताकि डॉक्टरों को अनुमान रहे कि रक्तदान कब तक संभव होगा। जैसे ही रवींद्र भोपाल पहुंचे, तुरंत मेडिकल जांच के बाद उनका रक्त निकाला गया। फिलहाल महिला अभी स्थिर हालत में है।
महिला का बॉम्बे ब्लड ग्रुप
डॉक्टर रोमेश जैन ने बताया कि एसोसिएट प्रोफेसर एक प्रेग्नेंट महिला करीब चार महीने से लगाता आ रहीं थीं, हमें इस दौरान पता चला कि महिला का बॉम्बे ब्लड ग्रुप है, जिसके बाद हम पिछले तीन महीने से डिलीवरी के लिए उस ब्लड की तलाश कर रहे थे। वह ब्लड हमें भोपाल में कहीं से भी उपलब्ध नहीं हो पाया। इस दौरान हमें पता चला कि अशोक नायक जो कि ब्लड डोनेशन सेक्टर में लंबे समय से काम कर रहे हैं। उन्होंने हमारा संपर्क रवींद्र जो कि शिर्डी में रहते हैं उनसे करवाया। वह रात भर में भोपाल पहुंचे। जिसके बाद उन्होंने ब्लड डोनेट किया। जिसके बाद महिला की सुरक्षित डिलीवरी करवा पाए।
कहीं नहीं मिल रहा था ब्लड
महिला के पति कपिल ने बताया कि हम तीन महीने से परेशान हो रहे थे, हमें नहीं लग रहा था कि यह ब्लड कहीं मिलेगा। कई जगहों पर पता करने के बाद निराश ही मिली। मैं रवींद्र जी का आभारी हूं। जो ऐसे समय में वह भोपाल आए। वहीं शिर्डी से आए रवींद्र ने कहा कि बाई कार आया हूं। 28 फरवरी की रात शिर्डी से निकलकर 1 मार्च को भोपाल पहुंचा। मैं लोगों से यही कहूंगा कि रक्त दान हम तीन महीने में करना चाहिए, इससे किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है।