पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा आपातकाल में कई जिंदगियों को बचाने ने अहम भूमिका निभा रही है। इसी कड़ी में भोपाल की रहने वाली 7 वर्षीय बालिका को लीवर की गंभीर बीमारी के उपचार के लिए भोपाल से गुड़गांव एयरलिफ्ट कर भर्ती करवाया गया। मरीज के आयुष्मान कार्ड धारक होने के कारण यह सुविधा निशुल्क उपलब्ध करवाई गई। बच्ची के परिजनों ने पेट दर्द, त्वचा के पीले पड़ने, मल में खून आने की समस्या के इलाज के लिए 19 मई को भोपाल के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया था। अस्पताल में प्राथमिक जांच में एक्यूट हेपिटाइटिस विथ इंपैंडिंग फैलियर पाया गया। जिसके बाद एयर एम्बुलेंस द्वारा मरीज को इलाज के लिए गुड़गांव के निजी अस्पताल की पीडियाट्रिक लिवर यूनिट में रेफर किया गया है।
गुड़गांव के चिकित्सकों से समन्वय
एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय,भोपाल द्वारा जिला प्रशासन और संचालनालय स्वास्थ्य सेवाओं से संपर्क कर करवाई गई। इसके साथ ही गुड़गांव के चिकित्सकों से समन्वय कर मरीज को शिफ्ट करवाया गया। जहां आगे का इलाज चल रहा है। सीएमएचओ भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी के निर्देशन में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज हुरमाड़े एवं चिकित्सकों की देखरेख में पूरी प्रक्रिया कराई गई। मरीज के भोपाल स्थित अस्पताल से डिस्चार्ज से लेकर मरीज के एयर लिफ्ट होने तक पूरे समय स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही।
नि:शुल्क परिवहन की व्यवस्था
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन की इस योजना से गंभीर मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थाओं में बेहद कम समय में पहुंचाकर त्वरित उपचार मिल रहा है। आयुष्मान कार्डधारी के उपचार के लिये राज्य के अंदर एवं राज्य के बाहर सभी शासकीय एवं आयुष्मान सम्बद्ध अस्पतालों में उपचार के लिए नि:शुल्क परिवहन की व्यवस्था है। अन्य हितग्राही जो कि आयुष्मान कार्डधारी नहीं हैं, उनके उपचार के लिए राज्य के अंदर स्थित शासकीय अस्पतालों में निःशुल्क परिवहन जबकि राज्य के बाहर के किसी भी अस्पताल में अनुबंधित दर पर सशुल्क परिवहन सेवा उपलब्ध है।
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इलाज के लिए नहीं था वक्त
बच्ची को 19 मई को पेट में तेज दर्द, त्वचा पर पीलापन और मल में खून की शिकायत के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में सामने आया कि बच्ची की हालत नाजुक है और उसे विशेष इलाज की जरूरत है। स्थानीय अस्पतालों में उसकी गंभीर स्थिति के लिए जरूरी विशेषज्ञता उपलब्ध नहीं थी।