मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा पर उपचुनाव की तारीखें तय हो गई हैं।
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कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी बढ़ा सकती है मुसीबत
कांग्रेस के सामने 2023 का सामाजिक समीकरण दोहराने की चुनौती है। पार्टी को अनुसूचित जाति और ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ बनाए रखने के साथ-साथ आंतरिक गुटबाजी से भी बचना होगा। उम्मीदवार चयन और कार्यकर्ताओं की एकजुटता कांग्रेस की सफलता का प्रमुख आधार होगी। यहां से पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के बेटे अनुज भारती, पूर्व विधायक घनश्याम सिंह और अवधेश नायक के नाम चर्चा में है।
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उपचुनाव में कांटे का मुकाबला होगा
वरिष्ठ पत्रकार देवश्री माली का मानना है कि दतिया उपचुनाव बेहद कांटे का मुकाबला होगा। उनके अनुसार भाजपा की जीत के लिए ब्राह्मण मतदाताओं का पूरा समर्थन, जाटव समाज के वोटों में सेंध और ओबीसी वर्ग के पर्याप्त समर्थन की जरूरत होगी। साथ ही सिंधी समाज और भाजपा संगठन की सक्रियता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। माली का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विकास कार्यों की रफ्तार को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठे हैं। यदि भाजपा यह भरोसा दिलाने में सफल रहती है कि अगले दो वर्षों में विकास कार्यों को गति मिलेगी तो उसे इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है। वहीं उनके अनुसार कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत उसका सामाजिक समीकरण है। उनका मानना है कि राजेंद्र भारती की यादव समाज में अच्छी पकड़ रही है और यदि कांग्रेस यादव, दांगी तथा अनुसूचित जाति के मतदाताओं को एकजुट रखने में सफल रहती है तो भाजपा के लिए मुकाबला आसान नहीं होगा।
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यह होंगे चुनाव के प्रमुख मुद्दे?
स्थानीय विकास और अधूरे प्रोजेक्ट, सड़क, पेयजल और शहरी सुविधाएं, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों के साथ ही उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि चुनाव में अहम होगी। दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि 2023 के बाद इस क्षेत्र में मतदाताओं का राजनीतिक रुझान किस दिशा में बढ़ रहा है। यही कारण है कि इस चुनाव पर पूरे प्रदेश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।