भोपाल एम्स का लगातार विस्तार किया जा रहा है। मरीजों को बेहतरीन सुविधा देने के लिए नए-नए प्रयोग किया जा रहे हैं। इसी कड़ी में नेत्र विभाग की ओपीडी में दो नई रिफ्रैक्शन यूनिट्स की शुरुआत की गई। इस यूनिट के शुरू होने से एम्स में आने वाले आंख के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही नेत्र रोगियों को बेहतर, त्वरित और उच्च गुणवत्ता वाली जांच सेवाएं मिल सकेगी। एम्स के अधिकारियों का कहना है कि इन इकाइयों की स्थापना से नेत्र जांच की प्रक्रिया अधिक सुलभ और प्रभावी हो सकेगी, जिससे आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
इन मरीजों को मिलेगा लाभ
नई रिफ्रैक्शन यूनिट्स के माध्यम से अपवर्तन सेवाएं (जैसे दृष्टि परीक्षण और चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस की सलाह), कॉर्निया टोपोग्राफी (जिससे कॉर्निया की सतह का विस्तृत विश्लेषण संभव होता है), और हेस स्क्रीनिंग (आंखों की मांसपेशियों की स्थिति एवं गति का मूल्यांकन) जैसी सेवाएं प्रदान की जाएंगी। ये सेवाएं विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी होंगी जिन्हें नियमित नेत्र परीक्षण, विशेष नेत्र समस्याओं की जांच या विस्तृत परामर्श की आवश्यकता होती है।
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नेत्र जांच की गुणवत्ता में आएगा सुधार
एम्स के डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने कहा है कि हमारा निरंतर प्रयास है कि मरीजों को कम समय में सुलभऔर उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएं। ये नई रिफ्रैक्शन यूनिट्स न केवल मरीजों की प्रतीक्षा अवधि को घटाएंगी, बल्कि नेत्र जांच की गुणवत्ता और दायरे को भी बढ़ाएंगी। इस प्रकार की पहलें हमारे संस्थान की सेवा-प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। नेत्र विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भावना शर्मा ने इन नई इकाइयों के शुभारंभ को नेत्र सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इन इकाइयों के माध्यम से मरीजों को समय पर जांच और परामर्श की सुविधा मिल सकेगी, जिससे उनके उपचार में मदद मिलेगी।