फीट 11 इंच का सुदर्शन शरीर, चंद्रमुखी कांति से युक्त दमकते चेहरे वाला आभा मंडल, माथे पर लाल चंदन का टीका, गले में सूर्य लॉकेट और मीठी बोली.. कुछ ऐसी पर्सनालिटी के धनी थे भय्यूजी महाराज।
उनकी यही छवि लोगों को उनकी ओर आकर्षित करती थी। दिखने में तो वह बहुत खुश लगते थे लेकिन असल जिंदगी में वह उतने खुश नहीं थे। दुनिया को अाध्यात्म का पाठ पढ़ाने वाले भय्यू जी खुद तनाव भरी जिंदगी जी रहे थे और फिर इस जिंदगी से तंग आकर उन्होंने अपनी ईह- लीला ही खत्म कर ली।
उनके करीबियों का कहना है कि जब से भय्यू जी ने दूसरी शादी की थी तब से वह कभी स्थिर नजर नहीं आए। उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाना भी कम कर दिया था। वह अपने भक्तों से आश्रम में ही मुलाकात करते थे उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाना भी कम कर दिया था। सूत्र बताते हैं कि दूसरी शादी के बाद से ही वह खुश नहीं थे जितना कि वह मीडिया में नजर आते थे।
करीबियों का कहना है कि उनकी दूसरी पत्नी डॉ. आयुषी शर्मा उनके सार्वजनिक और निजी जीवन में काफी हस्तक्षेप करने लगी थीं। अक्सर ही भय्यू के परिजनों और भक्तों का उनकी पत्नी से विवाद होता रहता था। भय्यू अपनी कई बातें करीबियों तक से छुपाने लगे थे।
जानकारी के मुताबिक वह तीन महीने पहले ही दुबारा पिता बने थे। पिता बनने की बात उन्होंने आश्रम के कुछ चुनिंदा लोग और परिजनों से ही शेयर की थी। यह बात चौंकाती है कि उन्होंने अपनी दूसरी शादी की बात भी कई महीनों तक सार्वजनिक नहीं की थी, वहीं दूसरी बार पिता बनने की खबर को भी सार्वजनिक नहीं किया।
दोनों पति पत्नी का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा था। यही नहीं खबर तो यह भी है कि उनकी पत्नी और उनकी बड़ी बेटी कुहु की भी नहीं पटती थी। यही वजह थी की दोनों अलग-अलग भी रहने लगे थे। महाराज ने अपनी पत्नी को इंदौर स्थित स्प्रिंग वेली फेस-2 के फ्लैट में शिफ्ट कर दिया था।
और खुद के लिए उन्होंने अपने पुराने विजय नगर स्थित मकान को रेनोवेशन कराना शुरू कर दिया था। कहा तो ये भी जा रहा है कि बड़ी बेटी कुहु जब पूणे से इंदौर आती थी तब दूसरी पत्नी आयुषी और कुहु में काफी टकराव होता था।
अपनी पत्नी और बेटी के बीच होने वाली इस लड़ाई से वह काफी परेशान रहते थे। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि कई बार दोनों के बीच अप्रिय घटना भी हुई थी।