मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में एक गांजा जब्ती मामले में विशेष न्यायालय ने पुलिस की कार्रवाई को फर्जी करार दिया है। वर्ष 2023 में दर्ज इस मामले में चार पुलिसकर्मियों श्रीराम मंडलोई, रविंद्र कन्नौजे, जगजोध सिंह और प्रशांत पर झूठी रिपोर्ट और फर्जी साक्ष्य पेश करने का आरोप साबित हुआ।
मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में एक गांजा जब्ती मामले में विशेष न्यायालय के आदेश ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। अदालत ने इस मामले में पुलिस की पूरी कार्रवाई को फर्जी और झूठे साक्ष्यों पर आधारित बताते हुए चार पुलिसकर्मियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही विभागीय कार्रवाई करने का भी आदेश दिया गया है।
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'झूठे मामलों पर कानून मौन रहा तो सिस्टम पर से उठ जाएगा जनता का भरोसा'
यह मामला वर्ष 2023 में दर्ज एक गांजा तस्करी के केस से जुड़ा है, जिसमें विशेष न्यायाधीश रईस खान की अदालत ने अभियुक्त मोहसिन खान को दोषमुक्त करार देते हुए टिप्पणी की कि पुलिसकर्मियों ने झूठी कहानी गढ़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार किए और अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा,"यदि ऐसे झूठे मामलों पर कानून मौन रहा, तो आम आदमी का सिस्टम से भरोसा खत्म हो जाएगा। पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ झूठी साजिश रची है।"
इन चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब अपराध दर्ज कर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इसके अलावा संबंधित विभाग को आंतरिक अनुशासनात्मक कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं। फैसले के बाद आरोपी मोहसिन खान और उनके अधिवक्ता अरविंद उपाध्याय ने कोर्ट के आदेश को न्याय की जीत बताया और कहा कि आखिरकार सच सामने आया है।