मध्य प्रदेश में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि प्रदेश में गैस की कोई कमी नहीं है। लेकिन दूसरी ओर कई जगहों पर गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें भी देखने को मिल रही हैं। इसी बीच बड़वानी की कलेक्टर जयति सिंह का एक बयान सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में नई बहस शुरू कर दी है।
शादियों और बड़े आयोजनों को लेकर दी सलाह
दरअसल, बड़वानी जिले की कलेक्टर जयति सिंह ने शादियों और बड़े आयोजनों को लेकर एक सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में लोग गैस सिलेंडर की जगह इंडक्शन चूल्हा या डीजल भट्टी का उपयोग भी कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि ज्यादा ईंधन खर्च करने वाले व्यंजन जैसे रोटी और पराठे की जगह अन्य डिशेज भी बनाई जा सकती हैं।
गैस खपत कम करने पर जोर
कलेक्टर जयति सिंह ने कहा कि पारंपरिक रूप से शादी समारोहों में बड़ी मात्रा में रोटी और पराठे बनाए जाते हैं, जिनमें काफी मात्रा में रसोई गैस खर्च होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इंडेन गैस की कमी की स्थिति को देखते हुए यदि आयोजक इनके स्थान पर कम ईंधन में बनने वाले अन्य व्यंजन मेन्यू में शामिल करें, तो इससे गैस की खपत कम की जा सकती है। इससे उपलब्ध गैस का बेहतर उपयोग भी हो सकेगा।
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मेन्यू में बदलाव की बात
कलेक्टर ने बताया कि कई बड़े आयोजनों में खाना बनाने के दौरान बड़ी संख्या में गैस सिलेंडरों का उपयोग होता है। इससे गैस की मांग अचानक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि यदि लोग थोड़ी सावधानी बरतें और मेन्यू में बदलाव करें, तो ईंधन की बचत संभव है। इससे आम उपभोक्ताओं को भी गैस उपलब्ध कराने में आसानी होगी।
वैकल्पिक साधनों के उपयोग का सुझाव
कलेक्टर जयति सिंह ने यह भी सुझाव दिया कि शादी समारोहों और अन्य बड़े आयोजनों में खाना बनाने के लिए वैकल्पिक साधनों का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इंडक्शन चूल्हा, डीजल भट्टी या अन्य ईंधन आधारित विकल्प अपनाने से गैस की खपत कम की जा सकती है। कलेक्टर के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद इस मुद्दे पर लोगों के बीच चर्चा भी शुरू हो गई है।