मध्यप्रदेश में विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने की दिशा में रविवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम के तहत आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्मित बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया। ये भैंसे एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े में अपनी क्वारंटाइन अवधि पूरी कर चुके थे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जंगली भैंसों को स्थानीय आबोहवा के अनुकूल बनाकर वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगभग 100 वर्षों बाद कान्हा के सूपखार में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण शुरू हो रहा है। इन भैंसों को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के विशेष सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर मध्यप्रदेश लाया गया है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें पूरी तरह प्राकृतिक आवास में मुक्त करने की दिशा में आगे कदम बढ़ाया जाएगा।
ये भी पढ़ें-
अच्छी खबर: कूनो में भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी चीतों से अधिक, कुल 54 में से 38 भारतीय मूल के
दो चरणों में काजीरंगा से लाए गए जंगली भैंसे
इस पुनर्स्थापना परियोजना के तहत काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को लाया गया था। प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर भैंसे को छोटे बाड़े में छोड़ा गया। इसके बाद, 9 मई 2026 को पुनः तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को इसी बाड़े में रखा गया। इन सभी को अनुकूलन के लिए क्वारंटाइन में रखा गया था, जिन्हें अब बड़े बाड़े में मुक्त कर दिया गया है।
आगामी तीन वर्षों में 50 भैंसों को बसाने का लक्ष्य
मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसे लगभग 150 वर्ष पहले विलुप्त हो चुके थे। सूपखार क्षेत्र में पूर्व में इनके पाए जाने के ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर ही इस परियोजना को यहां क्रियान्वित किया जा रहा है। वन विभाग ने मुख्यमंत्री की प्रेरणा से एक विशेष योजना तैयार की है, जिसके अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को यहाँ पुनः स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। यह कदम प्रदेश की जैव विविधता को समृद्ध करने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
वन्यजीव संरक्षण और क्षेत्रीय विकास
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया कि प्रदेश सरकार वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि 7 अक्तूबर को नौरादेही में रानी दुर्गावती अभयारण्य के रूप में चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की शुरुआत की गई है। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में क्षेत्र से नक्सलवाद के खात्मे की सराहना करते हुए कहा कि 'लाल सलाम को अंतिम सलाम' देने के बाद अब बालाघाट और इसके आसपास के क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेजी से गति मिल रही है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्रीमती समिता राजोरा, कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक प्रकाश वर्मा सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, वन अमला और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह परियोजना मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को एक नई और सकारात्मक दिशा प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री पहुंचे कान्हा टाइगर रिजर्व
मुख्यमंत्री पहुंचे कान्हा टाइगर रिजर्व
मुख्यमंत्री पहुंचे कान्हा टाइगर रिजर्व