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MP: दोस्ती निभाने उतरा तो खुद भी नहीं लौटा... जहरीली गैस ने ली दो दोस्तों की जान, 5 घंटे बाद कुएं से निकले शव

Fri, 10 Jul 2026 12:34 PM IST
बालाघाट ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट

सार

बालाघाट के किरनापुर थाना क्षेत्र के पिपरटोला गांव में खराब मोटर ठीक करने के दौरान जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी से दो दोस्तों की दर्दनाक मौत हो गई। पहले महेश चौधरी कुएं में उतरे और बेहोश हो गए। उन्हें बचाने के लिए युवराज बिसेन भी बिना सुरक्षा उपकरण के नीचे उतरे, लेकिन वे भी गैस की चपेट में आ गए।
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मौके पर मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बालाघाट जिले के किरनापुर थाना क्षेत्र के पिपरटोला गांव में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। खराब मोटर ठीक करने के लिए कुएं में उतरे एक व्यक्ति की जहरीली गैस से तबीयत बिगड़ गई। उसे बचाने के लिए उसका दोस्त बिना अपनी जान की परवाह किए कुएं में उतर गया, लेकिन यह कोशिश दोनों के लिए आखिरी साबित हुई। जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी से दोनों की कुएं के भीतर ही मौत हो गई। देर रात एसडीईआरएफ की टीम ने करीब पांच घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद दोनों के शव बाहर निकाले।

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मोटर ठीक करने उतरे, फिर नहीं लौटे

पुलिस के अनुसार, पिपरटोला निवासी महेश चौधरी (45) गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने मित्र युवराज बिसेन (55) के घर के पीछे बने लगभग 50 फीट गहरे कुएं में खराब पानी की मोटर ठीक करने के लिए उतरे थे। कुछ ही देर बाद कुएं के भीतर मौजूद जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश होकर गिर पड़े।

दोस्त को बचाने गया, खुद भी चपेट में आ गया

ऊपर खड़े युवराज बिसेन ने जब महेश को बाहर नहीं आते देखा तो बिना किसी सुरक्षा उपकरण के खुद कुएं में उतर गए। लेकिन नीचे पहुंचते ही वे भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। कुछ ही मिनटों में दोनों की सांसें थम गईं।

पांच घंटे चला रेस्क्यू, रात में निकाले गए शव

घटना की सूचना मिलते ही किरनापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कुएं में जहरीली गैस होने की आशंका के चलते तुरंत रेस्क्यू शुरू नहीं किया जा सका। इसके बाद बालाघाट से एसडीईआरएफ की टीम को बुलाया गया। रात में शुरू हुए रेस्क्यू अभियान के दौरान एसडीईआरएफ के जवान करण सिंह वल्के ने ऑक्सीजन सिलेंडर, फेस मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरण पहनकर करीब 50 फीट गहरे कुएं में उतरने का साहसिक फैसला किया। रस्सियों और विशेष उपकरणों की मदद से रात करीब 10 से 10:30 बजे के बीच दोनों शव सुरक्षित बाहर निकाले गए। पूरे अभियान के दौरान गांव के सैकड़ों लोग घटनास्थल पर मौजूद रहे। सभी को उम्मीद थी कि दोनों जिंदा बाहर आ जाएंगे, लेकिन आखिरकार गांव को मातम ही मिला।

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पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे जाएंगे शव

थाना प्रभारी राजकुमार चौधरी ने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण कुएं में जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी माना जा रहा है।

रेस्क्यू में कई जवानों ने निभाई अहम भूमिका

रेस्क्यू अभियान में थाना पुलिस, होमगार्ड और एसडीईआरएफ की संयुक्त टीम ने हिस्सा लिया। अभियान में हवलदार सुनील कुमार नागपुरे, एएसआई महेश कुमार, सैनिक संजय चौधरी, सतीश तोमर, करण सिंह वल्के, विशाल रजक, आशीष खरोले, राजेश धुर्वे और चेतेश्वर राहंगडाले शामिल रहे।

विशेषज्ञों की सलाह

इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बिना सुरक्षा उपकरण और गैस की जांच के गहरे कुओं में उतरना कितना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुएं, सेप्टिक टैंक या अन्य बंद स्थानों में उतरने से पहले गैस और ऑक्सीजन का परीक्षण करना, पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करना और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही भी कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती है।

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