बालाघाट में एम्बुलेंस ड्राइवर की घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। मलेरिया मरीज को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने के बजाए ड्राइवर ने बीच जंगल में एम्बुलेंस को रोक दिया। फिर रिश्वत मांगी। नहीं मिलने पर जंगल में वाहन खड़ा करके तेंदुआ देखने के लिए ड्राइवर और तकनीशियन निकल गए। मरीज को समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई।
मध्य प्रदेश के बालाघाट में इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। एक मलेरिया पीड़ित युवती की मौत इसलिए हो गई क्योंकि एम्बुलेंस ड्राइवर और तकनीशियन ने घने जंगल में गाड़ी रोक दी। इसके बाद वे तेंदुआ देखने चले गए। इतना ही नहीं, उन्होंने मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों से पैसों की भी मांग की।
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गांव की दो बहनें थीं बीमार
स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, बैहर ब्लॉक के ग्राम जत्ता निवासी गायत्री उईके (20) और उसकी बहन राधिका उईके दोनों मलेरिया से पीड़ित थीं। सोमवार रात करीब 8:57 बजे डॉक्टरों ने गायत्री को हालत नाजुक होने पर बिरसा अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर किया। एम्बुलेंस करीब सवा 10 बजे मरीज को लेकर बालाघाट के लिए निकली। लेकिन मरीज की बहन सरिता मर्सकोले का आरोप है कि रास्ते में ड्राइवर ललित पवार और टेक्नीशियन अनिल राहंगडाले ने एम्बुलेंस रोक दी। पहले तो दोनों ने निजी अस्पताल ले जाने का दबाव बनाया, फिर घने जंगल के पास तेंदुआ देखने के लिए गाड़ी रोक दी। इसके बाद उन्होंने परिजनों से 700 रुपए की मांग की। परिजनों ने 600 रुपए दिए, तब जाकर एम्बुलेंस आगे बढ़ी।
देरी के चलते बिगड़ी हालत, अस्पताल में तोड़ा दम
एम्बुलेंस रात करीब 12:10 बजे जिला अस्पताल पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इलाज के दौरान गायत्री की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर एम्बुलेंस समय पर पहुंच जाती तो गायत्री की जान बचाई जा सकती थी।
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कलेक्टर के आदेश पर हुई कार्रवाई, दोनों गिरफ्तार
घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर मृणाल मीणा ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सीएमएचओ की शिकायत पर बिरसा थाने में मामला दर्ज कर ड्राइवर ललित पवार और ईएमटी अनिल राहंगडाले को गिरफ्तार कर लिया गया है। एसपी आदित्य मिश्रा ने कहा कि ऐसी लापरवाही असहनीय है। जो लोग मानवता की सेवा के काम में हैं, अगर वही इस तरह की हरकत करेंगे तो सख्त कार्रवाई तय है।