बच्चों की मौत से हड़कंप मचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डाला डेरा
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बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल गांवों में फैली बीमारी ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अडोरी कुंडेकसा बोंदारी और कोरका गांवों में अब तक 1 से 13 साल की उम्र के छह बच्चों की मौत हो चुकी है। लगातार बच्चों के बीमार पड़ने की जानकारी सामने आने के बाद भोपाल तक प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज से विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय टीम प्रभावित गांवों में पहुंचकर बीमारी की जांच कर रही है।
पोषण की कमी और दूषित पानी बनी बड़ी वजह
जबलपुर मेडिकल कॉलेज के महामारी विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र विश्नोई के नेतृत्व में पहुंची टीम ने प्रारंभिक जांच में बच्चों में पोषण की कमी और दूषित पानी को बीमारी की प्रमुख वजह माना है। विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई। इसके चलते बच्चे संक्रमण की चपेट में आसानी से आ गए।
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बच्चों में दिखे ये लक्षण
बीमारी की शुरुआत में बच्चों के शरीर पर दाने निकलने के साथ बुखार, मुंह में छाले, भूख नहीं लगना और झटके आने जैसे लक्षण सामने आए। बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने से ग्रामीण इलाकों में हड़कंप की स्थिति बन गई। हालांकि बीमारी की सटीक वजह और संक्रमण की पुष्टि के लिए बच्चों के सैंपल पुणे स्थित लैब में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद बीमारी की वास्तविक स्थिति और कारण स्पष्ट होने की उम्मीद है।
47 बच्चे अस्पताल में भर्ती
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में शिविर और अस्थायी अस्पताल बनाकर इलाज शुरू कर दिया है। बीमार बच्चों और ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। वर्तमान में 47 बच्चे बैहर और बालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती हैं। इलाज के बाद स्वस्थ हुए 51 बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।
6 बच्चों की मौत की पुष्टि
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने 6 बच्चों की मौत की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट भोपाल भेज दी है। प्रशासन की निगरानी में प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीमों की तैनाती की गई है। विशेषज्ञों की टीम बीमारी के कारणों का पता लगाने के साथ ही पानी और पोषण की स्थिति की भी जांच कर रही है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।