Dhar: संभागायुक्त डॉक्टर पवन शर्मा और आईजी राकेश गुप्ता सहित कई अधिकारी भोजशाला पहुंचे।
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पुलिस प्रशासन भी अपनी तैयारियों में जुटा है। वसंत पंचमी को धार छावनी में बदल दिया जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। भोजशाला परिसर में 100 मीटर की बैरिकेडिंग की जाएगी। वसंत पंचमी पर सुरक्षा की दृष्टि से इस बार 600 जवान तैनात किए जाएंगे। भोजशाला परिसर में 100 पुलिसकर्मी अलसुबह से शाम तक तैनात रहेंगे। वहीं 150 पुलिसकर्मियों का बल जुलूस में शामिल रहेगा। गुरुवार को संभागायुक्त डॉक्टर पवन शर्मा और आईजी राकेश गुप्ता, साथ में डीआईजी चन्द्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर धार डॉक्टर पंकज जैन, अपर कलेक्टर श्रृंगार श्रीवास्तव भोजशाला परिसर पहुंचे। अधिकारियों ने तैयारियों की समीक्षा की।
इस बार का वसंत उत्सव कार्यक्रम
वसंत पंचमी पांच फरवरी को सुबह सात बजे मां सरस्वती यज्ञ प्रारंभ होगा। सुबह 10 बजे घोड़ा चौपाटी से मां वाग्देवी शोभायात्रा निकाली जाएगी। दोपहर 12 बजे भोजशाला में महाआरती होगी। 12.30 बजे से धर्मसभा होगी। शाम साढ़े पांच बजे भोजशाला में पूर्णाहुति एवं महाआरती होगी। छह फरवरी को खाटू श्याम की भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। दोपहर ढाई बजे भोजशाला में मातृशक्ति सम्मेलन होगा। सात फरवरी को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन होगा। इसके सूत्रधार एवं संचालक विश्व विख्यात हास्य कवि संदीप शर्मा रहेंगे। आठ फरवरी को नियमित सत्याग्रह पश्चात कन्या पूजन और भोजन के साथ आयोजन का समापन होगा।
Dhar: भोजशाला में वसंत पंचमी पर उत्सव मनाया जाएगा।
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मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला लंबे समय से विवाद में रही है। करीब 800 साल पुरानी इस भोजशाला को लेकर हिंदू-मुस्लिम मतभेद हैं। हिंदुओं के अनुसार भोजशाला यानी सरस्वती का मंदिर है। जबकि मुस्लिम इसे पुरानी इबादतगाह बताते हैं। धार की ऐतिहासिक भोजशाला उसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह राजा भोज द्वारा स्थापित सरस्वती सदन है यहां कभी 1000 वर्ष पूर्व शिक्षा का एक बड़ा संस्थान हुआ करता था। बाद में यहां पर राजवंश काल में मुस्लिम समाज को नमाज के लिए अनुमति दी गई, क्योंकि यह इमारत अनुपयोगी पड़ी थी। पार्टी में सूफी संत कमाल मौलाना की दरगाह है। ऐसे में लंबे समय से मुस्लिम समाज में नमाज अदा करने का कार्य करते रहे। परिणाम स्वरूप पर दावा करते हैं कि यह भोजशाला नहीं बल्कि कमाल मौलाना की दरगाह है।
जबकि हिंदू समाज यह दावा करता है कि यह दरगाह नहीं बल्कि राजा भोज के काल में स्थापित सरस्वती सदन भोजशाला है। इतिहास में भी इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि यहां से अंग्रेज मां सरस्वती की प्रतिमा निकाल कर ले गए जो कि वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में सुरक्षित भी है। विवाद की शुरुआत 1902 से बताई जाती है, जब धार के शिक्षा अधीक्षक काशीराम लेले ने मस्जिद के फर्श पर संस्कृत के श्लोक खुदे देखे थे और इसे भोजशाला बताया था। विवाद का दूसरा पड़ाव 1935 में आया, जब धार महाराज ने इमारत के बाहर तख्ती टंगवाई जिस पर भोजशाला और मस्जिद कमाल मौलाना लिखा था। आजादी के बाद ये मुद्दा सियासी गलियारों से भी गुजरा। मंदिर में जाने को लेकर हिंदुओं ने आंदोलन किया। जब-जब वसंत पंचमी और शुक्रवार साथ होते हैं, तब-तब तनाव बढ़ता है।
वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने पर बढ़ता है तनाव

बता दें कि इस बार वसंत पंचमी शनिवार को पड़ रही है। शुक्रवार को पड़ने पर तनाव की स्थिति बन जाती है। क्योंकि शुक्रवार को मुस्लिम समाजजन भी भोजशाला में नमाज पढ़ने जाते हैं। इस दिन प्रशासन को अतिरिक्त ताकत के साथ डटना पड़ता है। क्योंकि हिंदू-मुस्लिम एक साथ में भोजशाला में होते हैं। हालांकि प्रशासन दोनों को आमने-सामने नहीं आने देता। धार की ऐतिहासिक भोजशाला में प्रति मंगलवार हिंदू समाज पूजा-अर्चना करता है, जबकि प्रति शुक्रवार को दोपहर 1:00 से 3:00 बजे तक नमाज की अनुमति होती है। जबकि वसंत पंचमी पर हिंदू समाज को पूरे दिन पूजा-अर्चना की अनुमति होती है। यह अनुमति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा दी गई है। इसी के आदेश का पालन करना होता है।
दरअसल जब भी वसंत पंचमी अवसर आता है तो इस बात की चिंता रहती है कि उस दिन शुक्रवार नजदीक ना हो, क्योंकि शुक्रवार और वसंत पंचमी 1 दिन आते हैं तो तनाव की स्थिति निर्मित होती हैं। एक ही दिन में दोनों धार्मिक आयोजन कर पाना संभव नहीं होता है। ऐसे में एक बहुत बड़ी चिंता का विषय खड़ा हो जाता है। इस बार वसंत पंचमी पर विवाद की स्थिति निर्मित नहीं है, लेकिन भोजशाला को लेकर सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे और कोई तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो इसलिए यहां पर सुरक्षा की दृष्टि से बड़े अधिकारियों ने गुरुवार को व्यवस्था का अवलोकन किया है। साथ ही हजारों की संख्या में लोग गोशाला पहुंचेंगे। इसलिए उनके आने और जाने की व्यवस्था का भी अधिकारियों ने अवलोकन किया।