मध्यप्रदेश में इस बार न सिर्फ भाजपा बल्कि कांग्रेस की भी लड़ाई मुश्किल नजर आ रही है। खास तौर पर कांग्रेस ने शुरुआत में जैसा सोचा था वैसा होता नजर नहीं आ रहा है। जब कांग्रेस ने कमलनाथ को राज्य की कमान सौंपी थी तब उन्होंने सोचा था कि भाजपा से निपटने के लिए एक महागठबंधन बनाया जाएगा।
लेकिन हालात ने करवट ली और कमलनाथ का ये सपना धरा का धरा रह गया। बताया जाता है कि कमलनाथ चाहते थे कि बसपा को 30 सीटें दी जाएं और कांग्रेस 200 सीटों पर चुनाव लड़े।
लेकिन बसपा सुप्रीमो मायावती 60 सीटों पर अड़ी हुई थीं जिससे गठबंधन का बात सिरे नहीं चढ़ सकी। आखिर में ये हुआ कि बसपा ने अकेले ही 230 सीट पर लड़ने का एलान कर कांग्रेस को करारा झटका दे दिया।
मध्यप्रदेश में इस बार भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई कतई आसान नहीं है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि कई दल चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। इन दोनों दलों के अलावा बसपा, सपाक्स, आप भी मैदान में ताल ठोक रही है। इससे पहले यहां द्विपक्षीय मुकाबला ही होता रहा है, लेकिन पहली बार कई दल चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
लेकिन कांग्रेस बेफिक्र
लेकिन कांग्रेस इससे चिंतित नजर नहीं आ रही है। राज्य कांग्रेस के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी का कहना है कि 230 सीटों पर लड़ने का एलान करना और सही मायनों पर 230 सीटों पर लड़ना दो अलग-अलग बातें हैं। आप और सपाक्त को 230 उम्मीदवार आखिर कहां से मिलेंगे। कई उम्मीदवारों की तो जमानत जब्त हो जाएगी।