फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्यार के लिए बदला सबकुछ: जानें अशोकनगर की कहानी जिसने समाज व सोच को दी चुनौती; नेनशु ने नमन बनकर शुरू किया सफर

Wed, 14 Jan 2026 11:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अशोकनगर

सार

अशोकनगर जिले से सामने आई एक अनोखी प्रेम कहानी ने सामाजिक सोच की सीमाओं को चुनौती दी है। प्रेम और आत्मसम्मान के लिए नेनशु ने जेंडर परिवर्तन कर ‘नमन’ के रूप में नई पहचान अपनाई और अपने जीवनसाथी अनीता के साथ नई जिंदगी की शुरुआत की। पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
प्यार के लिए नैनशू ने करवाया जेंडर चेंज।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अशोकनगर। संत कबीरदास ने प्रेम को जिस संकरी गली से होकर गुजरने वाला बताया था, उसकी सजीव झलक मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले से सामने आई एक अनोखी प्रेम कहानी में देखने को मिलती है। यह कहानी केवल एक व्यक्ति के परिवर्तन की नहीं, बल्कि उस साहस और आत्मस्वीकृति की है, जिसने सामाजिक सोच की सीमाओं को चुनौती दी।

जिले की पिपरई तहसील के एक छोटे से गांव में जन्मी नेनशु बचपन से ही स्वयं को अलग महसूस करती थीं। जन्म से महिला होने के बावजूद उनकी सोच, भावनाएं और जीवन को देखने का नजरिया पुरुषों जैसा था। यह आंतरिक द्वंद्व लंबे समय तक उनके भीतर चलता रहा, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक दबाव के कारण वे इसे खुलकर व्यक्त नहीं कर सकीं।

दोनों एक-दूसरे के प्रति भावनात्मक रूप से जुड़ती चली गईं

विज्ञापन

करीब तीन वर्ष पहले पढ़ाई के सिलसिले में नेनशु इंदौर गईं। वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी पहचान असम की रहने वाली अनीता से हुई। शुरुआती बातचीत धीरे-धीरे गहरी दोस्ती में बदली और समय के साथ दोनों एक-दूसरे के प्रति भावनात्मक रूप से जुड़ती चली गईं। जल्द ही दोनों ने यह महसूस किया कि वे एक-दूसरे के बिना अपना भविष्य नहीं देख सकतीं।

जेंडर परिवर्तन कराने का साहसिक कदम उठाया
जब साथ रहने और जीवनसाथी के रूप में पहचान की बात सामने आई, तो सामाजिक स्वीकार्यता सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई। काफी आत्ममंथन के बाद नेनशु ने अपने भीतर की सच्चाई को स्वीकार करने का निर्णय लिया और जेंडर परिवर्तन कराने का साहसिक कदम उठाया। यह निर्णय भावनात्मक ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद कठिन था।

दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने सर्जरी के लिए लाखों रुपये खर्च होने की बात कही। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली नेनशु के लिए यह बड़ी चुनौती थी, लेकिन प्रेम और आत्मसम्मान के आगे उन्होंने हार नहीं मानी। नेनशु और अनीता ने इंदौर में अलग-अलग काम कर, सीमित संसाधनों में रहते हुए करीब तीन वर्षों तक मेहनत कर आवश्यक धनराशि जुटाई। जब तैयारी पूरी हुई, तो नेनशु दिल्ली पहुंचीं, जहां उन्हें कई महीनों तक चले इलाज के दौरान तीन जटिल सर्जरी से गुजरना पड़ा। यह दौर शारीरिक पीड़ा और मानसिक तनाव से भरा था, लेकिन अनीता हर कदम पर उनके साथ रहीं और उनका संबल बनीं।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें- सादगी की मिसाल: इंदौर एयरपोर्ट पर अकेले दिखे नारायण मूर्ति, खुद उठाया बैग; यात्री से बोले कृपया जगह दें...
विज्ञापन


बाधाओं के बीच प्रेम को दिया सम्मान
इलाज पूरा होने के बाद नेनशु की पहचान बदल गई। अब वे ‘नमन’ के नाम से जाने जाते हैं। यह परिवर्तन केवल नाम या पहचान तक सीमित नहीं था, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत थी। ऐसे जीवन की, जिसमें उन्होंने अपने सच को स्वीकार किया और सामाजिक बाधाओं के बीच अपने प्रेम को सम्मान दिया। आज नमन और अनीता साथ रहकर एक नई जिंदगी की शुरुआत कर चुके हैं। उनकी कहानी न केवल प्रेम की शक्ति को दर्शाती है, बल्कि आत्मस्वीकृति, साहस और समानता का भी संदेश देती है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें