अशोकनगर। संत कबीरदास ने प्रेम को जिस संकरी गली से होकर गुजरने वाला बताया था, उसकी सजीव झलक मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले से सामने आई एक अनोखी प्रेम कहानी में देखने को मिलती है। यह कहानी केवल एक व्यक्ति के परिवर्तन की नहीं, बल्कि उस साहस और आत्मस्वीकृति की है, जिसने सामाजिक सोच की सीमाओं को चुनौती दी।
जिले की पिपरई तहसील के एक छोटे से गांव में जन्मी नेनशु बचपन से ही स्वयं को अलग महसूस करती थीं। जन्म से महिला होने के बावजूद उनकी सोच, भावनाएं और जीवन को देखने का नजरिया पुरुषों जैसा था। यह आंतरिक द्वंद्व लंबे समय तक उनके भीतर चलता रहा, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक दबाव के कारण वे इसे खुलकर व्यक्त नहीं कर सकीं।
दोनों एक-दूसरे के प्रति भावनात्मक रूप से जुड़ती चली गईं
जेंडर परिवर्तन कराने का साहसिक कदम उठाया
जब साथ रहने और जीवनसाथी के रूप में पहचान की बात सामने आई, तो सामाजिक स्वीकार्यता सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई। काफी आत्ममंथन के बाद नेनशु ने अपने भीतर की सच्चाई को स्वीकार करने का निर्णय लिया और जेंडर परिवर्तन कराने का साहसिक कदम उठाया। यह निर्णय भावनात्मक ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद कठिन था।
दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने सर्जरी के लिए लाखों रुपये खर्च होने की बात कही। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली नेनशु के लिए यह बड़ी चुनौती थी, लेकिन प्रेम और आत्मसम्मान के आगे उन्होंने हार नहीं मानी। नेनशु और अनीता ने इंदौर में अलग-अलग काम कर, सीमित संसाधनों में रहते हुए करीब तीन वर्षों तक मेहनत कर आवश्यक धनराशि जुटाई। जब तैयारी पूरी हुई, तो नेनशु दिल्ली पहुंचीं, जहां उन्हें कई महीनों तक चले इलाज के दौरान तीन जटिल सर्जरी से गुजरना पड़ा। यह दौर शारीरिक पीड़ा और मानसिक तनाव से भरा था, लेकिन अनीता हर कदम पर उनके साथ रहीं और उनका संबल बनीं।