राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मध्य क्षेत्र सह-बौद्धिक प्रमुख हितानंद शर्मा की माताजी जनकदुलारी शर्मा का मंगलवार सुबह भोपाल के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 90 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। परिजनों के अनुसार उनका उपचार लगातार जारी था, लेकिन उम्र संबंधी जटिलताओं के चलते उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से परिवार सहित गांव और राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।
जनकदुलारी शर्मा का पार्थिव शरीर दोपहर तक अशोकनगर जिले के मढ़ी महिदपुर गांव लाया गया। गांव में दोपहर लगभग 3 बजे अंतिम यात्रा निकाली जाएगी, जिसके लिए स्थानीय स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। ग्रामीणों और शुभचिंतकों का अंतिम दर्शन के लिए पहुंचना प्रारंभ हो गया है। गांव का माहौल गमगीन है और हर व्यक्ति उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।
पूर्व में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहुंचे थे हालचाल लेने
बताया जाता है कि जनकदुलारी शर्मा पिछले दो महीनों से अधिक समय से अस्वस्थ थीं। प्रारंभिक उपचार गांव में ही किया गया था। उस दौरान हितानंद शर्मा भी लंबे समय तक गांव में रहकर माताजी की सेवा में लगे रहे। इस अवधि में प्रदेश के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि मढ़ी गांव पहुंचे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विभिन्न मंत्री, विधायक और जिला पदाधिकारी भी हालचाल जानने पहुंचे थे।
हितानंद शर्मा का परिवार सादगीपूर्ण जीवन के लिए जाना जाता है। उनके माता-पिता लंबे समय से मढ़ी गांव में ही रह रहे थे। कुछ महीने पहले केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी गांव का दौरा किया था। उस दौरान यह तथ्य चर्चा में आया था कि बड़े पद पर आसीन होने के बावजूद हितानंद शर्मा के माता-पिता सामान्य ग्रामीण परिवेश में सादगी से जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
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गौरतलब है कि हितानंद शर्मा पूर्व में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। बाद में उनकी संगठन में वापसी हुई और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में मध्य क्षेत्र सह-बौद्धिक प्रमुख का दायित्व सौंपा गया। वर्तमान में उनका मुख्यालय जबलपुर निर्धारित है, जहां से वे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में वैचारिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
जनकदुलारी शर्मा के निधन पर सामाजिक, राजनीतिक और संघ परिवार से जुड़े अनेक लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां जारी हैं और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। उनका जीवन सादगी, पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों का प्रतीक माना जाता रहा है।