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अशोकनगर जिला अस्पताल में शर्मनाक तस्वीर: मेटरनिटी वार्ड की गैलरी में जमीन पर हुआ प्रसव, सिस्टम हुआ बेनकाब

Tue, 20 Jan 2026 10:59 AM IST
अशोकनगर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अशोक नगर

सार

Ashok Nagar: जिला अस्पताल की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई, जब गर्भवती महिला को इलाज के बजाय गैलरी में जमीन पर प्रसव कराना पड़ा। स्टाफ की उदासीनता और रेफर की अस्पष्टता ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। पढे़ं पूरी खबर

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अशोकनगर जिला चिकित्सालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अशोकनगर जिला अस्पताल एक बार फिर अपनी बदहाल व्यवस्थाओं और लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला मेटरनिटी वार्ड से सामने आया है, जहां नारायणपुर गांव की रहने वाली एक गर्भवती महिला को इलाज की बजाय अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए कि महिला को मेटरनिटी वार्ड की गैलरी में ही, जमीन पर प्रसव कराना पड़ा।
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जानकारी के अनुसार, प्रसूता को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के मेटरनिटी स्टाफ ने महिला को “हाईरिस्क केस” बताकर भोपाल रेफर करने की बात कही। हैरानी की बात यह रही कि महिला के किसी भी चिकित्सकीय दस्तावेज में रेफर किए जाने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। ऐसे में परिजन असमंजस में पड़ गए और महिला को न तो समय पर भर्ती किया गया और न ही प्रसव कक्ष उपलब्ध कराया गया। स्थिति बिगड़ती देख परिवार की महिलाओं ने मेटरनिटी वार्ड की गैलरी में त्रिपाल की आड़ लेकर महिला का प्रसव कराया।

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अस्पताल जैसी जगह पर इस तरह की स्थिति न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मानवता को भी शर्मसार करती है। जमीन पर प्रसव कराए जाने का दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी बेहद पीड़ादायक रहा। प्रसूता के पति ने जिला अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने ध्यान दिया होता, तो महिला को इस अमानवीय स्थिति से नहीं गुजरना पड़ता। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, हमेशा की तरह इस मामले में भी सिविल सर्जन भूपेंद्र सिंह शेखावत ने जांच की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।

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सवाल यह है कि क्या सिर्फ जांच के आश्वासन से व्यवस्थाएं सुधरेंगी, या फिर ऐसी घटनाएं आगे भी यूं ही दोहराई जाती रहेंगी। जिला अस्पताल पहले भी कई बार अव्यवस्थाओं, लापरवाही और मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार को लेकर सुर्खियों में रहा है। ताजा मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर गर्भवती महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य तंत्र कितना संवेदनशील है।

कब क्या हुआ?
  • नारायणपुर गांव की गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल लाया गया।
  • मेटरनिटी स्टाफ ने महिला को हाईरिस्क केस बताकर भोपाल रेफर करने की बात कही।

  • किसी भी चिकित्सकीय दस्तावेज में रेफर का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।

  • महिला को न तो भर्ती किया गया और न ही प्रसव कक्ष उपलब्ध कराया गया।

  • हालात बिगड़ने पर परिजनों ने वार्ड की गैलरी में त्रिपाल की आड़ लेकर प्रसव कराया।

  • परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच व कार्रवाई की मांग की।

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