मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक किसान संगठन ने 112 विधायकों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। इस संगठन से जुड़े किसानों का आरोप है कि अलग-अलग दलों के ये विधायक पिछले पांच साल के दौरान खेती से जुड़े मुद्दों को उठाने में विफल रहे हैं।
आम किसान यूनियन (एकेयू) के नेता केदार सिरोही का कहना है कि इस साल के अंत में होने वाले चुनावों से पहले किसान इन विधायकों से अपने कल्याण के लिए किए गए कार्यों का ब्योरा मांगेंगे। इसके बाद किसान सोच-समझकर चुनावों में अपने वोट का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा, हमने ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाली विधानसभाओं से 112 विधायकों को चुना है, जिन्होंने विधानसभा में किसानों से जुड़े मुद्दों पर एक भी सवाल नहीं पूछा। हालांकि उन्होंने अपने संगठन के सरकार या किसी राजनीतिक दल के खिलाफ होने से इनकार किया है।
5 हजार से कम मतों से जीतने वाले पर ध्यान
यूनियन ने उन विधायकों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो पिछले विधानसभा चुनावों में 5 हजार से भी कम मतों से विजयी हुए थे। इन 112 विधायकों में 86 सत्ताधारी भाजपा के हैं, जबकि 24 विधायक प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के हैं। शेष दो विधायक निर्दलीय के तौर पर विजयी हुए थे। सिरोही ने कहा, हमारे कार्यकर्ता चयनित विधानसभाओं के केवल 20 सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले गांवों में जाकर किसानों को वोट करने से पहले इन बातों को ध्यान में रखने के लिए कहेंगे।
भाजपा ने बताया आंदोलन को गलत
भाजपा प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय ने कहा, यदि किसान संगठन राजनीति करना चाहते हैं तो उन्हें खुले तौर पर सामने आना चाहिए। मध्य प्रदेश सरकार को फसल उत्पादन में वृद्धि के लिए लगातार 6 बार कृषि कर्मन पुरस्कार मिला है। सरकार ने शून्य ब्याज पर कृषि ऋण दिलाए हैं और बिजली आपूर्ति में सब्सिडी दी है। साथ ही राज्य की सिंचाई क्षमता पिछले एक दशक में 600 फीसदी बढ़ाई है।