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नवरात्रि विशेष: नवरात्रि में मां बगलामुखी मंदिर में क्यों बंद हुए वीआईपी दर्शन? जानें मंदिर समिति का नया प्लान

Sat, 10 Oct 2026 07:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगर मालवा

सार

शारदीय नवरात्रि के दौरान नलखेड़ा स्थित मां बगुलामुखी मंदिर में सभी श्रद्धालुओं के लिए समान दर्शन व्यवस्था रहेगी। गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा और चार कतारों से दर्शन कराने की तैयारी है। मंदिर समिति का करीब 30 मिनट में दर्शन कराने का लक्ष्य है। 
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बगुलामुखी मंदिर, नलखेड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं को सुगम और व्यवस्थित दर्शन कराने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर में आम और खास का अंतर नहीं रहेगा। वीआईपी सहित किसी भी श्रद्धालु को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। सभी भक्तों को निर्धारित व्यवस्था के तहत एक समान तरीके से मां के दर्शन करने का अवसर मिलेगा। गौरतलब है कि देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां बगलामुखी के दर्शन और हवन-पूजन के लिए नलखेड़ा पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में वीआईपी श्रद्धालुओं को प्रोटोकॉल के अनुसार सुविधाएं दी जाती हैं लेकिन नवरात्रि में सभी के लिए समान दर्शन व्यवस्था लागू रहेगी। मंदिर प्रबंधन समिति का प्रयास है कि भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं को कम से कम परेशानी हो।

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तीस मिनट में दर्शन का लक्ष्य
मंदिर समिति के अनुसार श्रद्धालुओं को पार्किंग स्थल से करीब 100 मीटर पैदल चलकर त्रिशूल मंडपम तक पहुंचना होगा। यहां चार कतारों के माध्यम से दर्शन की व्यवस्था बनाई जा रही है। समिति का दावा है कि भीड़ अधिक होने पर भी श्रद्धालुओं को लगभग आधे घंटे में मां के दर्शन कराने का प्रयास किया जाएगा। मंदिर के नजदीक स्थित पार्किंग स्थल पर वाहनों को निर्धारित क्षमता के अनुसार खड़ा कराया जाएगा। जगह भरने पर आसपास के चिन्हित स्थलों पर वाहनों की पार्किंग कराई जाएगी ताकि यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।

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बगुलामुखी मंदिर, नलखेड़ा - फोटो : अमर उजाला

रोजाना 30 हजार से अधिक भक्त आने का अनुमान
नवरात्रि के दौरान मां बगलामुखी के दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। अनुमान के मुताबिक सामान्य दिनों में प्रतिदिन 30 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। अवकाश के दिनों में यह संख्या बढ़कर करीब 60 हजार तक पहुंचने की संभावना है, जबकि अष्टमी पर भक्तों की संख्या एक लाख तक पहुंच जाती है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

हवन के लिए नए कुंड तैयार
मां बगलामुखी मंदिर में हवन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से हवन करने पर शत्रु बाधाओं से मुक्ति, विवादों में राहत और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसी वजह से नवरात्रि के दौरान हवन कराने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।

बगुलामुखी मंदिर, नलखेड़ा - फोटो : अमर उजाला
कई बार हवन कुंड खाली होने का इंतजार करना पड़ता है। श्रद्धालुओं को इस परेशानी से बचाने और अधिक लोगों को हवन का अवसर देने के लिए इस वर्ष नए हवन कुंड बनाए गए हैं। मंदिर समिति ने हवन-पूजन के लिए प्रति हवन कुंड 350 रुपये शुल्क निर्धारित किया है। श्रद्धालु मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग भी करा सकते हैं। इससे मंदिर पहुंचने के बाद हवन के लिए लंबा इंतजार करने की जरूरत कम होगी।

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श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष प्रबंध 
भीड़ और गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दर्शन के लिए कतार में खड़े भक्तों को राहत देने के लिए पेयजल और छांव की व्यवस्था की जाएगी। किसी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर मदद के लिए चिकित्सा टीम भी उपलब्ध रहेगी।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए मंदिर परिसर में नवरात्रि से पुलिस चौकी संचालित होगी। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों के जरिए परिसर की निगरानी की जाएगी। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन यातायात, पार्किंग तथा भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था को भी व्यवस्थित करने में जुटे हैं।
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बगुलामुखी मंदिर, नलखेड़ा - फोटो : अमर उजाला
तीन काउंटरों पर मिलेगा लड्डू प्रसाद
नवरात्रि में मां के दर्शन के साथ श्रद्धालु प्रसाद भी घर ले जा सकेंगे। इसके लिए मंदिर में सशुल्क लड्डू प्रसाद उपलब्ध कराया जाएगा। प्रसाद की मांग को देखते हुए मंदिर प्रबंधन तीन बिक्री काउंटर स्थापित करेगा। समिति के अनुसार प्रसाद मंदिर प्रबंधन की देखरेख में तैयार किया जाता है और उसकी शुद्धता का ध्यान रखा जाता है।

महाभारत काल से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर को महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है और यहां माता की प्रतिमा स्वयं सिद्ध मानी जाती है। मंदिर में मां बगलामुखी के दाईं ओर महालक्ष्मी और बाईं ओर मां सरस्वती विराजमान हैं। मंदिर के ठीक सामने स्थित करीब 80 फीट ऊंची दीपमाला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में भक्त मां को उपहार अर्पित करने और हवन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।

मां बगलामुखी मंदिर प्रबंधन समिति की अध्यक्ष देवकुंवर सोलंकी के अनुसार, शारदीय नवरात्रि में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। सुगम दर्शन, पेयजल, छांव, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा, यातायात और पार्किंग व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि देशभर से आने वाले भक्त बिना परेशानी के दर्शन-पूजन कर सकें।
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