पेट्रोलियम पदार्थों की आसमान छूती कीमतों के मद्देनजर इन पर वसूले जाने वाले कर घटाने की जोर पकड़ती मांग के बीच पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि इस तरह की कटौती का असर ज्यादा दिन तक टिक नहीं सकेगा, क्योंकि फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में भारी अस्थिरता है। प्रधान ने बुधवार को यहां एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से कहा, "मूल बात यह है कि इन दिनों अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी उथल-पुथल मची है।
अगर इस समय केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क और राज्यों के मूल्य संवर्धित कर (वैट) में कमी का उपाय करती भी है, तब भी इसका असर कुछ दिनों के बाद खत्म हो जायेगा क्योंकि फिलहाल कच्चे तेल की कीमतें कतई स्थिर नहीं हैं।" यह पूछे जाने पर कि महंगाई से जनता को राहत देने के लिये पेट्रोलियम पदार्थों पर वसूले जाने वाले करों में कितनी कटौती की गुंजाइश है, पेट्रोलियम मंत्री ने जवाब दिया, "जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में स्थिरता नहीं आती, तब तक इस तरह का आकलन उचित नहीं होगा।"
उन्होंने, हालांकि, कहा कि पेट्रो पदार्थों की मूल्य वृद्धि सरकार के लिये "चिंता का विषय" है और जनता को इससे राहत देने के लिये कुछ रास्ता निकालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधान ने कहा, "हमें इस बात की चिंता है कि (पेट्रो पदार्थों की महंगाई के कारण) आम लोगों की क्रय शक्ति को लेकर कोई दिक्कत न आये।"
बहरहाल, केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे वक्त सामने आया है, जब मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरीखे भाजपा शासित सूबों के आसन्न विधानसभा चुनावों से ऐन पहले विपक्षी दल पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई को मुद्दा बनाते हुए केंद्र और राज्य सरकार से मांग कर रहे हैं कि वे जनता को राहत देने के लिये इन पर फौरन कर घटायें। प्रधान ने कहा कि इन राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा अच्छा प्रदर्शन करेगी।
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा, "अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण दुनिया भर की मुद्राएं इसके आगे गिर रही हैं। भारत में पेट्रो पदार्थों की कीमतों में इजाफे का प्रमुख कारण डॉलर की तुलना में रुपये का अवमूल्यन और तेल उत्पादक देशों द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती है।" प्रधान, पेट्रो पदार्थों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की कई बार वकालत कर चुके हैं। उन्होंने एक सवाल पर कहा कि यह जीएसटी परिषद पर ही निर्भर करता है कि पेट्रो पदार्थों को इस नयी कर प्रणाली के तहत कब तक लाया जायेगा।