पुलिस द्वारा भोपाल एम्स की एक महिला डॉक्टर सहित दो जूनियर डॉक्टरों की बुधवार को कथित पिटाई की घटना के बाद एक आरक्षक को लाइन हाजिर कर मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। हालांकि एम्स के निदेशक डॉ सरमन सिंह ने कहा कि हमें पुलिस से अब कोई शिकायत नहीं हैं क्योंकि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटना की तुरंत बाद हमसे संपर्क कर मामले में तुरंत कार्रवाई की है।
उन्होंने कहा, 'कोरोना महामारी के चलते एक बड़े संकट के समय ऐसी छोटी बातों पर अधिक ध्यान देना हमें उचित नहीं लगता है।' यह घटना तब हुई जब बुधवार शाम को दो जूनियर डॉक्टर भोपाल एम्स में ड्यूटी के बाद परिसर में अपने आवास में लौट रहे थे।
वहीं भोपाल उत्तर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सांई कृष्णा थोटा ने कहा, 'पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटना के तुरंत बाद एम्स प्रबंधन से संपर्क कर संबंधित आरक्षक को ड्यूटी से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया और मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।'
एसपी ने बताया, 'पुलिस को सूचना मिली थी कि एम्स के पास कुछ सब्जी विक्रेता जमा हैं। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस के दो आरक्षक एक चार पहिया वाहन में वहां पहुंचे। पुलिस को देखकर लोग यहां-वहां भागने लगे। वहीं पास में सादे कपड़े में ये दो युवा डॉक्टर खड़े मिले और पुलिसकर्मी भागती हुई भीड़ के बीच इन्हें पहचान नहीं सके। ये डॉक्टर वहां सब्जी नहीं बल्कि पास में ही दूध खरीद रहे थे। तभी इनके बीच कहासुनी हो गयी।'
उन्होंने कहा, 'दोनों डॉक्टरों को कोई बड़ी चोट नहीं आई है और न ही कोई फैक्चर हुआ है। डॉक्टर और पुलिस कोरोना वायरस की महामारी के खिलाफ लड़ने के लिए एक ही मोर्चे पर खड़े हैं। हम दोनों स्तम्भों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध चाहते हैं इसलिए स्थिति से निपटने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। एसपी ने कहा कि वर्तमान में कठिन हालातों के मद्देनजर एम्स के वरिष्ठ डॉक्टरों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आपस में मुलाकात कर अपनी अपनी स्थिति सामने रखी।'