देश में चीतों को फिर से बसाने के लिए कवायद जारी है। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी चीतों को बसाने के लिए कई तरह की तैयारियां की जा रही हैं। अब पार्क प्रबंधन ने कूनो नेशनल पार्क के बाहर के फैले 500 वर्ग किमी के क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने की तैयारी है। अनुचित मानवीय गतिविधियों को रोकने के लिए विभाग ये कदम उठाने जा रहा है, ताकि वन्य जीवों को एक सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में आसपास के क्षेत्र के करीब 51 गांव प्रभावित होंगे।
प्रक्रिया को शुरू करने के लिए कुछ वक्त पहले पार्क प्रबंधन ने मसौदा तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा था। सरकार की ओर से इसे पोर्टल पर अपलोड करने के साथ ही नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। नोटिफिकेशन का आदेश कलेक्टर को भेजा गया है। कलेक्टर इस पर एक महीने में दावे-आपत्ति पेश करने के लिए जिले भर में पंचायत स्तर पर सूचना चस्पा कराएंगे। दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद निर्धारित क्षेत्र को इको सेंसिटिव घोषित कर दिया जाएगा। यह क्षेत्र पार्क की सीमा 748 वर्ग किमी के बाहर का होगा। इसकी जद में 51 राजस्व गांव आते हैं।
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ पीके वर्मा ने कहा कि भारत सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। कलेक्टर द्वारा इसमें दावे आपत्ति लेना है। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
बिना अनुमति के नहीं काटे जा सकेंगे पेड़
क्षेत्र के इको सेंसटिव जोन घोषित होने के बाद यहां बसे 51 गांवों में कई तरह की मानवीय गतिविधियों पर प्रतिबंध लग जाएगा। वर्तमान में जारी उत्खनन कार्य, पत्थर तोड़ने वाली इकाइयों और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर प्रतिबंध लगेगा। इस तरह के किसी नए कार्य को मंजूरी नहीं मिल सकेगी। क्षेत्र में बड़ी पनबिजली परियोजनाओं की स्थापना, नई आरा मिलों, ईंट भट्टों की स्थापना और लकड़ी के ईधन के व्यावसायिक उपयोग पर भी रोक लग जाएगी। एक किमी के दायरे में नया वाणिज्यिक होटल और रिसॉर्ट खोलने की अनुमति नहीं मिलेगी। निजी भूमि पर लगे पेड़ों को काटने की भी विभाग से अनुमति लेनी होगी।