कुलांचे भरता जेब्रा और हवा से बातें करता जिराफ। लांग जंप लगाता कंगारू और बाइक को पछाड़ती रफ्तार का मालिक शुतुरमुर्ग।
आने वाले समय में ये विदेशी वन्यजीव सूबे के प्राणि उद्यानों की शान बन सकते हैं। इन वन्यजीवों को लाए जाने की प्लानिंग चल रही है, लेकिन एक्सचेंज योजना के तहत नहीं बल्कि शॉपिंग कर के।
वो भी चंद सौ डॉलरों में। लंदन दौरे पर गई टीम को लांगलिट सफारी और व्हिपशनेड जू का दौरा करने के बाद कुछेक देशों के बेहतर प्रजाति के वन्यजीव अपने प्राणि उद्यानों के लिए भी पसंद आए हैं।
टीम नवंबर के दूसरे पखवाड़े में वहां गई थी। टीम में शामिल सूबे के पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) डॉ. रूपक डे ने बताया कि अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के कुछेक स्थानों पर ऐसे वन्यजीवों को चंद हजार डॉलरों में खरीदा जा सकता है, जिसका जल्द मसौदा तैयार किया जाएगा।
पीसीसीएफ डॉ. रूपक डे ने बताया कि बेहतर प्रजाति का जेब्रा मात्र 2500 डॉलर में आसानी से मिल सकता है। लगभग इतना ही खर्च ट्रांसपोर्टेशन में आएगा और एक बढ़िया ब्रीड का जेब्रा सूबे के प्राणि उद्यानों की शोभा बढ़ाएगा।
इससे कुछ ज्यादा कीमत चुकाकर जिराफ भी खरीदा जा सकता है। उन्होंने बताया कि ऐसी ही कुछ ब्रीड ऑस्ट्रेलिया से मंगाए जाने पर विभाग विचार कर रहा है। लिस्ट में शुतुरमुर्ग-कंगारू भी हैं, जिन्हें दाम चुका खरीदा जा सकता है।
लखनऊ जू की स्टार जिराफ फैमिली अनुभव-सुजाता का कुनबा लगातार चार बार उजड़ने के बाद अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया है।
चूंकि देश भर में कोलकाता के जिराफ रह रहे हैं, इसलिए उनके जेनेटिक्स बिगड़ रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल जेब्रा का भी है।
जू की ऐश्वर्या-संस्कृति के लिए जब पार्टनर ढूंढा गया तो पूरे देश में महज डेढ़ दर्जन नर-मादा जेब्रा ही पाए गए। इसलिए इनकी विदेशी ब्रीड लाने की भी प्लानिंग है।