- ग्राम पंचायत स्तर पर पशुओं का चिह्नीकरण किया जाएगा। चिह्नीकरण के समय पशुओं की आयु, लिंग, पशु स्वामी का नाम, पता व दूरभाष क्रमांक आदि दर्ज किया जाए।
- गोवंश को समय से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो, इसके लिए बीमारियों के सामान्य लक्षणों के साथ संबंधित पशु चिकित्साधिकारी के मोबाइल नंबर की वालपेंटिंग कराई जाए।
- गो आश्रय स्थलों के गोबर से वैल्यू एडेड प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे।
- बीडीओ हर 15 दिन पर बैठक कर निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण व संरक्षण संबंधी कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक इंतजाम करें।
- गोवंश आश्रय स्थलों में समुचित चारे, दाने की व्यवस्था, ठंड से बचाव के लिए झूल/अलाव की व्यवस्था, कुत्तों से गोवंश की सुरक्षा, पीने के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था ग्राम्य विकास, पंचायतीराज व नगर विकास विभाग करेंगे।