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Lucknow News: युवाओं को उठाना होगा जोखिम, नौकरी नहीं, खड़ा करें उद्योग

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उत्सव में चर्चा करते अति​थि।
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लखनऊ। देश के युवाओं को नौकरी के बजाय उद्यमिता के क्षेत्र में प्रयास करना चाहिए। युवाओं को पारंपरिक नौकरियों से आगे बढ़कर उद्यमिता अपनाने के लिए जोखिम उठाना होगा। भागीदारी भवन में चल रहे भागीदारी साहित्य उत्सव के दूसरे दिन रविवार को प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने डॉ. बीआर आंबेडकर द्वारा हाशिए पर खड़े समुदायों के अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष की सराहना की। कहा कि बाबासाहेब ने समाज में समानता और अवसर सुनिश्चित किया। कार्यक्रम में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि भागीदारी उत्सव समाज की प्रगति का एक सशक्त संदेश देता है।
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भागीदारी साहित्य उत्सव का दूसरा दिन सामाजिक व आर्थिक रूप से हाशिए के लोगों, दलित और स्त्री विमर्श के नाम रहा। अन्य आयोजनों में निर्मला पुतुल, अखिल कात्याल, रमेश कार्थिक, रोशेल डिसिल्वा और स्वरूपा रानी के विमर्श और कविताओं का भी सत्र आयोजित किया गया।
श्याम बेनेगल को दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल को श्रद्धांजलि दी गई। अभिनेता अतुल तिवारी ने बेनेगल द्वारा हाशिए के लोगों के लिए किए गए काम को याद किया। बेनेगल के शिष्य डॉ. सतीश शर्मा की लिखी व निर्देशित की गई दस मिनट की फिल्म यान भी दिखाई गई।
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साहित्य से मिलती है समाज को बदलने की प्रेरणा
दलित साहित्य पर चर्चा के सत्र में लेखक श्योराज सिंह बेचैन ने कहा कि साहित्य से प्रत्यक्ष रूप से सब कुछ नहीं बदल सकता, लेकिन परिवर्तन की प्रेरणा दे सकता है। आंध्र प्रदेश से आई दलित चिंतक चल्लापल्ली स्वरूपा रानी ने प्रीति चौधरी से बातचीत में कहा कि दलित साहित्य स्वभाव से ही राजनीतिक होता है और यह सामाजिक परिवर्तन का शक्तिशाली माध्यम है। सत्र का संचालन गुरु प्रकाश पासवान ने किया।
सिनेमा और मीडिया में हाशिए की आवाज़ें

सिनेमा और मीडिया में हाशिए की आवाजें विषय पर पत्रकार आशुतोष शुक्ला, पैट्रीसिया मुखीम, अभिनेता अतुल तिवारी, फिल्म निर्माता और शोधकर्ता सोमनाथ वाघमारे ने चर्चा की। वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दलित समुदाय मीडिया में अधिक संख्या में आएगा। पैट्रीसिया मुखीम ने पूर्वोत्तर भारत में हाल के दिनों में हुई हिंसा और मेघालय राज्य की समस्याओं पर बात की। उन्होंने इस क्षेत्र में गहरी जड़ें जमाए पितृसत्ता पर भी चर्चा की। अभिनेता अतुल तिवारी ने मीडिया और मनोरंजन उद्योग में दलितों की कम भागीदारी पर चिंता जताई।
काकोरी की जरदोजी ने लुभाया
भागीदारी उत्सव में जनजातीय कलाओं, हैंडीक्राफ्ट से बनी चीजों की स्टॉल लगी हैं। काकोरी कला को बढ़ावा दे रहीं फायजा अल्वी अपनी छात्राओं प्रतिभा और बरीरा के साथ एक स्टॉल पर मिलीं। स्टॉल पर हाथ से बनी कपड़ों की खूबसूरत पोटली व काकोरी की स्थानीय जरदोजी वाली चीजें दिखीं जो लोगों को काफी पसंद आईं।
लखीमपुर व बलरामपुर की थारू कला ने मोहा मन
लखीमपुर खीरी की थारू जनजाति द्वारा हाथ से बनी चीजें लोगों को काफी आकर्षित कर रही थीं। कलाकार शिवकुमारी, रामकली व कलावती, बलरामपुर की आशा देवी के हाथों की बनी मूंज और घास से बनी डलिया, रोटी और फल रखने की टोकरी देखने लायक थी।
लकड़ी के खिलौने देख खुश हुए बच्चे
यहां लगे वाराणसी की स्टॉल पर सदियों पुरानी कला- हाथ से बने रंग-बिरंगे लकड़ी के खिलौने बच्चों को खूब भा रहे थे। कलाकार मनभावती देवी और बलिराम ने बताया कि ये खिलौने वाराणसी की पुरानी लोककला है।

शदज बैंड ने मचाया धूम
भागीदारी उत्सव में शाम को शदज बैंड के कलाकारों ने माहौल में जादू भर दिया। जब उन्होंने- हम देखेंगे... गीत सुनाया तो लोग डूब से गए। बैंड के कलाकारों ने एक के बाद एक शानदार प्रस्तुतियां दीं। लोग देर तक थिरकते रहे।
बिरसा मुंडा की कहानी, हाशिए की कविताओं ने भरा जोश
बीबीएयू के विद्यार्थियों ने भगवान बिरसा मुंडा की कहानी पर नुक्कड़ नाटक पेश किया। बिरसा मुंडा के शौर्य की कहानी ने उत्सव में मौजूद दर्शकों में जोश भर दिया। इसके बाद बीबीएयू के विद्यार्थियों ने साइबर क्राइम से जागरूकता के लिए एक नुक्कड़ नाटक पेश किया। इसके बाद थारू होली का परंपरागत लोकनृत्य भी पेश किया गया।
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