लखनऊ। पुरातत्व में रुचि रखने वालों के लिए एक अनूठा अवसर सामने आया है। राज्य पुरातत्व निदेशालय की ओर से 30 जुलाई से 10 दिवसीय पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम कार्यशाला की शुरुआत की जा रही है। कार्यशाला में प्राचीन सिक्कों, मूर्तियों के निर्माण और संरचनात्मक तकनीकों से जुड़ी मौखिक एवं व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। इसके लिए कोई शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन पुरातत्व में रुचि रखने वाले 18 से 50 वर्ष आयु के लोग आवेदन कर सकते हैं।
निदेशक रेनू द्विवेदी ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य आम लोगों को स्मारकों, धरोहरों, धार्मिक स्थलों और पुरातत्व के प्रति जागरूक करना है। इस दौरान प्रागैतिहासिक काल, आद्य ऐतिहासिक काल, चित्रकला, आर्किटेक्चर, संरक्षण-परिरक्षण, अभिलेख एवं पुरालिपि जैसे विषयों पर विशेषज्ञ कक्षाएं लेंगे। गुप्त और कुषाण काल की मूर्तियों और मुद्राओं की पहचान की तकनीक भी प्रतिभागियों को सिखाई जाएगी।
देशभर से उमड़ा प्रतिभागियों का उत्साह
कार्यशाला के लिए अब तक महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, बिहार, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों से कुल 549 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, जबकि सीटों की कुल संख्या 300 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी राज्य पुरातत्व निदेशालय के माध्यम से अब भी आवेदन कर सकते हैं।