लखनऊ। गोसाईंगंज के उम्मेदखेड़ा गांव निवासी श्रमिक महेश (41) को रास्ते के विवाद में लाठी-डंडों से पीटकर मरणासन्न कर दिया गया। उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। इस मामले में तीन नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
महेश की मां सुमित्रा देवी के अनुसार, बेटा शुक्रवार सुबह मजदूरी करने गया था। शाम को लौटते समय पड़ोस के शिवा, राजन, पच्चू और उनके एक अज्ञात साथी ने उसे रोका और झगड़ा करने लगे। महेश ने विरोध किया तो आरोपियों ने लाठी-डंडों से पीटकर उसे अधमरा कर दिया। हमलावर महेश को मरा हुआ समझकर भाग गए। गांव के लोगों ने महेश को मरणासन्न हालत में देखा और परिजनों को सूचना दी। परिजन उसे सिविल अस्पताल ले गए। एडीसीपी साउथ रल्लापल्ली वसंथ कुमार ने बताया कि शिवा, राजन, पच्चू को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस पर लापरवाही का आरोप
महेश के परिजनों ने गोसाईंगंज पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस मौके पर पहुंची पर घायल महेश को अस्पताल नहीं पहुंचाया। महेश की बेटी अनीता ने आरोप लगाया कि पुलिस के पहुंचने पर पिता की सांसें चल रही थीं। समय पर अस्पताल पहुंचाया जाता तो उनकी जान बच सकती थी। गोसाईंगंज इंस्पेक्टर डीके सिंह ने इस आरोप को गलत बताया है। उनका दावा है कि पुलिस ने महेश को सबसे पहले सीएचसी गोसाईंगंज पहुंचाया था।
कई बार दी गई थी धमकी
सुमित्रा का आरोप है कि नामजद आरोपियों से रास्ते को लेकर उनका काफी समय से विवाद चल रहा था। आरोपियों ने महेश को कई बार जान से मारने की धमकी भी दी थी। हालांकि, उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि आरोपी उनके बेटे की हत्या कर सकते हैं। एडीसीपी ने बताया कि घायल महेश की तहरीर पर पहले मारपीट की धारा में एफआईआर दर्ज हुई थी। महेश की मौत के बाद अब गैर इरादतन हत्या की धारा बढ़ाई गई है।