लखनऊ। गर्भावस्था के दौरान परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से धूम्रपान के संपर्क में रहने से नवजात का वजन कम हो सकता है। उसे जन्मजात बीमारियां होने का भी खतरा रहता है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर केजीएमयू में रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने यह जानकारी दी।
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि तंबाकू और धूम्रपान से हर साल देश में 12 लाख मौतें होती हैं। इसके साथ ही 25 तरह की बीमारियां व 40 तरह के कैंसर हो सकते हैं। ब्रॉन्काइटिस, एसिडिटी, टीबी, हार्ट अटैक, फॉलिज, नपुंसकता, माइग्रेन, सिरदर्द, बालों का जल्द सफेद होना, रक्त संचरण प्रभावित होना, ब्लड प्रेशर की समस्या, सांस फूलना तथा नित्य क्रियाओं में अवरोध की समस्याएं भी तंबाकू से हो सकती हैं।
मिलाए जाते हैं लती बनाने वाले तत्व
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि इस साल की थीम अपील का पर्दाफाश: तंबाकू और निकोटीन उत्पादों पर उद्योगों की रणनीति को उजागर करना है। इस दिवस के आयोजन का उद्देश्य उन हथकंडों का खुलासा करना है, जो तंबाकू और निकोटीन उद्योग हानिकारक उत्पादों को आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इन उत्पादों को स्वाद, महक को बेहतर बनाने के लिए ऐसे तत्व मिला जाते हैं, जो लती बनाते हैं। इसके बाजार को आकर्षक बनाने के लिए सोशल और डिजिटल मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है।
27 करोड़ लोग करते हैं तंबाकू का सेवन
ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2016-17 के अनुसार देश में लगभग 27 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते है। तंबाकू सेवन शुरू करने की औसत आयु 18.7 वर्ष है। इसमें भी 13-15 वर्ष की आयु के 2.2 करोड़ किशोर हैं। जब कोई धूम्रपान करता है तो बीड़ी या सिगरेट का धुआं उसे पीने वाले के फेफड़ों में 30 फीसदी व आस-पास के वातावरण में 70 फीसदी रह जाता है। इससे परिवार के लोग व मित्र प्रभावित होते हैं, जिसे परोक्ष धूम्रपान कहते हैं। महिलाओं की तुलना में पुरूष कम उम्र में तंबाकू का सेवन शुरू कर देते हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार अमूमन धूम्रपान करने वाले की मौत धूम्रपान न करने वाले की तुलना में दस साल पहले हो जाती है।