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Lucknow News: ट्यूमर से 30 सप्ताह की गर्भवती जैसा हो गया युवती का पेट

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लोहिया संस्थान में हुई सर्जरी।
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लखनऊ। महज 19 साल की उम्र में सविता (बदला हुआ नाम) का पेट 30 सप्ताह की गर्भवती जैसा हो गया। विवाह न होने की वजह से आसपास के लोग दबी जुबान में बातें भी बनाने लगे। ऐसे में युवती के घरवाले उसे लेकर लोहिया संस्थान पहुंचे, जहां जांच करने पर पता चला कि उसकी बच्चेदानी में दुर्लभ प्रकार का ट्यूमर है। जटिल सर्जरी के बाद अब वह स्वस्थ है।
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यह सर्जरी डॉ. देवयानी मिश्रा, डॉ. स्मृति अग्रवाल, डॉ. वंदना गौतम और डॉ. अनिल कुमार ने की। डॉ. वंदना गौतम ने बताया कि बच्चेदानी (यूट्रस) में होने वाले ट्यूमर पत्थर जैसे कठोर होते हैं। वहीं, अंडाशय (ओवरी) में होने वाले ट्यूमर आमतौर पर पानी जैसे सौम्य होते हैं। लखनऊ के पड़ोसी जनपद निवासी इस युवती के मामले में कहानी अलग थी। बच्चेदानी में ट्यूमर कठोर होने के बजाय पानी जैसा मुलायम था। इसका आकार बहुत बड़ा था। इस वजह से सर्जरी करने में काफी समस्या हुई। जरा सी गलती होने पर बच्चेदानी को नुकसान पहुंच सकता था।
अच्छी बात रही कि बच्चेदानी को कोई नुकसान पहुंचाए बिना ट्यूमर निकाल दिया गया। अब युवती पूरी तरह से स्वस्थ है। इस मामले को दुर्लभ मानते हुए जर्नल ऑफ सर्जिकल स्पेशियलिटीज एंड रूरल प्रैक्टिस के जून 2026 अंक में स्थान मिला है।
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निजी अस्पताल में पेट चीरा, पर नहीं निकाल सके ट्यूमर

डॉ. स्मृति अग्रवाल ने बताया कि युवती को माहवारी संबंधित कोई समस्या नहीं थी। पेट के निचले हिस्से में दर्द और पेट में सूजन थी। निजी अस्पताल में सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड कराकर डॉक्टरों ने ऑपरेशन की योजना भी बनाई। ओटी में जब चीरा लगाकर देखा तो ट्यूमर की शुरुआत कहां से है, यह समझ नहीं आया। ऐसे में डॉक्टरों ने ट्यूमर निकाले बिना वापस टांके लगा दिए। संस्थान में की गई लेप्रोस्कोपी के दौरान गर्भाशय 30 सप्ताह के गर्भ के आकार का पाया गया। गर्भाशय की पिछली दीवार में 35x25 सेमी का एक बड़ा सिस्टिक ट्यूमर मिला।
कारण स्पष्ट नहीं

डॉ. देवयानी मिश्रा के मुताबिक, इस तरह के ट्यूमर की वजह स्पष्ट नहीं है। यह बेहद दुर्लभ प्रकार का मामला था। अच्छी बात रही कि घरवाले उसे लेकर संस्थान पहुंच गए। असावधानी होने पर बच्चेदानी को नुकसान पहुंचता और वह कभी मां नहीं बन पाती।
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