लखनऊ में किस्त न भरने पर आरोपियों ने युवक को बंधक बना लिया। पांच दिन तक उससे मजदूरी करवाई और जबरन उसका खून भी निकलवाया। शिकायत पर पुलिस पीड़ित परिवार को टरकाती रही। आगे पढ़ें पूरी खबर...
राजधानी लखनऊ में मोबाइल की किस्त न जमा कर पाने पर आठ सितंबर को रिकवरी एजेंट युवक को घर से ले गए। पांच दिन तक बंधक बनाकर मजदूरी करवाई और खून भी निकलवाया।
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आरोप है कि घरवाले जब निगोहां थाने एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे तो पुलिस ने टरका दिया। सोमवार को डीसीपी दक्षिणी के निर्देश पर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ अपहरण, बंधक बनाकर पीटने और जानलेवा हमला करने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
किस्तों पर 21 हजार का मोबाइल खरीदा था
निगोहां के राजाराम खेड़ा पुरहिया गांव निवासी नेवल ने गीता मोबाइल शॉप से किस्तों पर 21 हजार का मोबाइल खरीदा था। बड़े भाई राजकुमार ने बताया कि किस्त नहीं भर पाने पर आठ सितंबर को रिकवरी एजेंट शुभम व एक अज्ञात युवक उनके घर पहुंचे और मोबाइल छीन लिया।
नेवल को बाइक से ले जाकर एक ब्लड बैंक में खून निकलवाया। इसके बाद बंधक बनाकर पीटने के साथ मजदूरी कराई। 13 सितंबर को आरोपी ने राजकुमार को फोन करके किस्त के ढाई हजार मांगे। पैसे देने के बाद आरोपी और 12 हजार रुपये की मांग करने लगे। विरोध पर भाई को नदी में फेंकने की धमकी दी।
पांच दिन बाद लौटा तो पुलिस ने भगाया
आरोप है कि धमकी मिलने के पास राजकुमार पुलिस के पास पहुंचे तो एफआईआर लिखने के बजाय पुलिस ने सिर्फ उस नंबर पर कॉल की, जिससे रुपये मांगने के लिए फोन आया था। इसके बाद आरोपियों ने नेवल को कैब से गांव भिजवा दिया। घर आकर नेवल थाने पहुंचे तो दरोगा ने उन्हें डरा धमकाकर घर भेज दिया।
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डीसीपी दक्षिणी मुस्ताक ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दो टीमें गठित की गई हैं। लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की भी जांच की जाएगी। दोषी मिलने पर कार्रवाई होगी।