लखनऊ। नई भवन निर्माण उपविधि में उन लोगों के लिए मौका है जिन्होंने अवैध निर्माण कर लिया है। वे नीति के प्रावधानों के तहत शमन मानचित्र पास कराकर निर्माण को वैध करने के साथ सुरक्षित भी कर सकते हैं। इससे अलीगंज में हुए अग्निकांड जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है। शहर में अवैध निर्माणों की संख्या 50 हजार से अधिक मानी जाती है, लेकिन अब तक 203 लोगों ने ही अपने निर्माण को नई नीति के तहत वैध कराया है। इसके अलावा 55 और को मंजूरी मिलने वाली है।
बीते वर्ष जुलाई में नई भवन निर्माण उपविधि 2025 को लागू किया गया। इसे पहले से सरल बनाया गया, जिससे आवासीय सहित अन्य गतिविधियों के लिए कम जमीन पर ज्यादा से ज्यादा निर्माण हो सके। इसके लिए आवास विभाग ने 18 वर्ष पुरानी भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2008 के स्थान पर नए सिरे से भवन निर्माण एवं विकास उपविधि बनाई। इसमें 24 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़क पर स्थित आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दी गई। भवन की ऊंचाई पर प्रतिबंध हटा दिया।
इसी तरह 12 मीटर तक चौड़ी सड़क पर आवासीय भूखंड पर सिर्फ व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति की भी छूट दी गई, लेकिन इसके लिए शमन मानचित्र पास कराने की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया। इससे भू उपयोग आवासीय से व्यावसायिक करने के लिए सेटबैक और पार्किंग आदि व्यवस्थाओं को लागू किया जा सके और बिल्डिंग का जितना हिस्सा अवैध है उसे तोड़ा जा सके। शमन मानचित्र पास कराने का शुल्क भी तय है।
लोगों को किया जा रहा है जागरूक
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि लोगों को नई भवन निर्माण उपविधि के तहत निर्माण को वैध कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जोनल अधिकारी अपने जोन में जाकर बैठक कर रहे हैं। लोगों को बता रहे हैं कि वे किस तरह अपने निर्माण को मानकों के तहत वैध करा सकते हैं। अभी तक 250 से अधिक लोगों ने आवेदन किया है।
कोट
सुरक्षा और नियोजित विकास के लिए जरूरी है कि लोग नई भवन निर्माण उपविधि के तहत निर्माण वैध करा लें। इसके लिए मानकों का पालन करना होगा। नई नीति काफी सरल और लोगों के हित में है।
- प्रथमेश कुमार, वीसी एलडीए